कोविड की चुनौती में आयुष चिकित्सा  पद्धतियों की विशेष भूमिका ः मुख्यमंत्री

कोविड की चुनौती में आयुष चिकित्सा  पद्धतियों की विशेष भूमिका ः मुख्यमंत्री

कोविड की चुनौती में आयुष चिकित्सा  पद्धतियों की विशेष भूमिका ः मुख्यमंत्री
जयपुर, 11 मई। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोरोना का संक्रमण शहरों के साथ-साथ गांवों में और युवाओं में भी तेजी से फैल रहा है। साथ ही मौतों की संख्या भी बढ़ी है। प्रदेश के अस्पतालों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ पर अत्यधिक दबाव है। संकट की इस घड़ी में रोगियों के बेहतर उपचार और इस चुनौती से लड़ने के लिए जरूरी है कि आयुष पद्धतियों और इनसे जुडे़ तमाम संसाधनों का भी समुचित उपयोग सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि पहली लहर में आयुष पद्धति के माध्यम से कोरोना की जंग लड़ने में बड़ी मदद मिली थी। दूसरी लहर में भी इन पद्धतियों के सहयोग से हमें गांव-ढाणी तक लोगों की जीवन रक्षा में आसानी होगी।
मुख्यमंत्री मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुष की भारतीय चिकित्सा पद्धतियां इतनी कारगर हैं कि उनमें बिना दुष्प्रभावों के गंभीर एवं जटिल रोगों का जड़ से निदान करने की क्षमता मौजूद है। आवश्यकता इस बात है कि इन पद्धतियों के बारे में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी देकर इनके उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। राज्य सरकार इस दिशा में तमाम प्रयास कर रही है। बजट में कई घोषणाएं की गई हैं, जिनसे आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहन मिलेगा।
श्री गहलोत ने कहा कि हमारे बीच में से ही ऎसे कई उदाहरण मिलेंगे, जिनमें लोग आयुष पद्धतियों को अपनाकर कोरोना सहित अन्य गंभीर बीमारियों से सफलतापूर्वक लड़ पाए। यह पद्धतियां हमारे जीवन शैली, योग, आहारचर्या एवं ऋतुचर्या आदि से जुड़ी हुई हैं, अगर पूरे संयम और अनुशासन के साथ इनका पालन करें तो हम निरोगी बने रह सकते हैं। कोविड की इस आपदा में इन पद्धतियों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष विभाग ने कोरोना की पहली लहर में आयुर्वेदिक काढ़े, यूनानी काढ़े, क्वाथ, आर्सेनिक एल्बम जैसी दवाओं से लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया, उससे हमें काफी मदद मिली थी। दूसरी लहर में भी लोगों को जागरूक करने, कोरोना से बचाव तथा गांव-गांव तक फैली अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से विभाग संकट की इस घड़ी में निरन्तर अपनी भूमिका निभाए।
आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि निरोगी राजस्थान के संकल्प को साकार करने में आयुष चिकित्सा पद्धतियों की विशेष भूमिका है। उन्होंने कहा कि राज्य में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने बजट में 1 हजार आयुर्वेद औषधालयों को वैलनेस सेन्टर के रूप में विकसित करने, राज्य आयुष अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने जैसी महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। साथ ही, राज्य की नई आयुष नीति का भी अनुमोदन किया गया है।
आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में हमेशा ही आयुर्वेद एवं अन्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौर में इन पद्धतियों की भूमिका और बढ़ गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि वन विभाग के माध्यम से औषधीय पौधों की नर्सरियां स्थापित की जा सकती हैं।
आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के सचिव श्री सुरेश गुप्ता ने आयुष विभाग की गतिविधियों के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति डॉ. अभिमन्यु कुमार ने बताया कि कोरोना के समय में विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों को लगातार अध्ययन से जोड़े रखने के लिए ई-लर्निंग के माध्यम से स्टडी मैटेरियल तैयार किया है।
निदेशक आयुर्वेद श्रीमती सीमा शर्मा, निदेशक यूनानी डॉ. फैयाज, विशेषाधिकारी आयुर्वेद डॉ. मनोहर पारीक, अतिरिक्त निदेशक होम्योपैथी डॉ. धीरेन्द्र बंसल ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर आयुष चिकित्सा पद्धति से संबंधित जिला स्तर तक के अधिकारी वीसी से जुड़े।
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