कोरोना महामारी के बीच किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही

कोरोना महामारी के बीच किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही

कोरोना महामारी के बीच किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। कभी मंडी में बारदानों की कमी के कारण गेहूं की खरीदी में रुकावट, कभी भुगतान में देरी तो कभी हम्मालों की कमी…। अब सरकार के निर्णय ने उन्हें आर्थिक चोट दी है। संकट में फंसे अन्नदाताओं को अब 1200 रुपए में मिलने वाली डीएपी खाद के लिए 1900 रुपए चुकाने होंगे।

जानकारों का कहना है कि महंगे होते रासायनिक खाद के दाम से अब किसानों की लागत में भारी बढ़ोतरी होना तय है। पेट्रोल-डीजल के बाद मंहगी हुए खाद के सवाल पर किसानों का कहना है कि खेती अब घाटे का सौदा बन रही है।

किसान नेता बबलू जाधव ने कहा, लगातार रासायनिक उर्वरक खाद के भाव में बढ़ोतरी हो रही है। बात तो किसानों की आय दोगुनी करने की थी, इसके उलट आय दोगुनी तो नहीं हुई, बल्कि किसानों की लागत में बढ़ोतरी की जा रही है। दूसरी ओर किसानों को फसलों के उचित दाम तक नहीं मिल रहे। अब बढ़े हुए रासायनिक खाद की कीमतों से किसान आक्रोशित हैं। बढ़े हुए दाम तत्काल वापस लेना चाहिए।

अब डीएपी के लिए चुकाने होंगे 1900 रुपए
किसानों का कहना है, साल 2014 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुना करने का वादा करते थे। सत्ता में आने के बाद भी यह जारी रहा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ 5 महीने से ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में अब उर्वरकों की कीमतों में इजाफा कर दिया है।

डीएपी 50 किलो वाले बैग की कीमत में 58% की वृद्धि की गई है। 1200 रुपए में मिलने वाले डीएपी के लिए किसानों को अब 1900 रुपए चुकाने होंगे। देश में यूरिया के बाद किसान सबसे अधिक डीएपी और एनपीके 12 32 16 खाद का इस्तेमाल करते हैं, एनपीके खाद के भाव बढ़कर 1800 रुपए प्रति बैग हो गए हैं।

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