एक हजार डॉक्टरों की अस्थाई तौर पर भर्ती कर रहे हैं तो राजस्थान में सरकार के रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल। ऐसे विरोधाभास के चलते ही मरीजों को परेशानी हो रही है।

एक हजार डॉक्टरों की अस्थाई तौर पर भर्ती कर रहे हैं तो राजस्थान में सरकार के रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल। ऐसे विरोधाभास के चलते ही मरीजों को परेशानी हो रही है।

कोरोना से मुकाबला करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक हजार डॉक्टरों की अस्थाई तौर पर भर्ती कर रहे हैं तो राजस्थान में सरकार के रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल। ऐसे विरोधाभास के चलते ही मरीजों को परेशानी हो रही है।
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17 मई को राजस्थान भर के मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के हजारों रेजीडेंट डॉक्टरों ने प्रात: 8 से 10 बजे तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया। डॉक्टर ऐसा ही कार्य बहिष्कार 18 मई को भी करेंगे। यदि दो दिन के कार्य बहिष्कार के बाद भी सरकार ने मांगे नहीं मानी तो 19 मई से रेजीडेंट डॉक्टर अस्पतालों में जाना बंद कर देंगे। यानी पूर्ण कार्य बहिष्कार होगा। कोरोना काल में जब डॉक्टर के बिना अस्पतालों और मरीज एक मिनट भी नहीं रह सकता, तब यदि रेजीडेंट डॉक्टर 120 मिनट अस्पताल में उपस्थित नहीं रहेंगे, तब अस्पताल और मरीज के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। दो घंटे के कार्य बहिष्कार में कोविड मरीजों को शामिल नहीं किया, लेकिन 19 मई से जब पूर्ण बहिष्कार होगा तो कोविड मरीज भी शामिल होंगे। कोरोना काल में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल की आलोचना की जा सकती है, लेकिन सवाल यह भी है कि राज्य सरकार डॉक्टरों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं करती? रेजीडेंट और इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में कितना काम करते है, यह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि एक इंटर्न डॉक्टर को 233 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से स्टाइपेंड मिलता है। ऐसे ही मांगों को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन प्रदेशभर में पिछले दो वर्षों से आंदोलन कर रही है। लेकिन चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और न मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ठोस कार्यवाही कर रहे हैं। यदि 19 मई से सरकारी अस्पतालों के हजारों रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए तो मरीजों की भयावह स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद मानते हैं कि जब कोरोना ग्रामीण क्षेत्रों में फैल गया है, तब डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का महत्व और बढ़ गया है। इसलिए अस्थाई तौर पर एक हजार डॉक्टर और 25 हजार स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की जा रही है। सीएम गहलोत माने या नहीं, लेकिन ऐसे विरोधाभास के कारण ही प्रदेश में मरीजों को परेशानी हो रही है। सवाल उठता है कि जो सरकार एक हजार डॉक्टरों की भर्ती करने जा रही है क्या वो अपने डॉक्टरों से संवाद नहीं कर सकती? सरकार यदि एक हजार डॉक्टरों की भर्ती कर लेती है और कई हजार रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर चले जाते हैं तो क्या होगा? मौजूदा हालात में रेजीडेंट डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने से रोका जाना चाहिए। गरीब कोविड मरीज के लिए तो सरकारी अस्पतालों का ही सहारा है। सरकारी अस्पताल रेजीडेंट के भरोसे ही हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चाहिए कि रेजीडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बात करें। चूंकि सीएम गहलोत संवेदनशील इंसान है, इसलिए उनकी बात का वजन होगा। रेजीडेंट की जायज मांगें मानी चाहिए।

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