नासिक/मुंबई | देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक कार्यालय में सामने आए यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के आरोपों ने कॉर्पोरेट जगत को झकझोर दिया है। इस मामले पर पहली बार टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का आधिकारिक बयान आया है। उन्होंने इसे ‘बेहद गंभीर एवं पीड़ादायक’ बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि टाटा समूह किसी भी तरह के कार्यस्थल उत्पीड़न या दबाव को बर्दाश्त नहीं करता है।
उच्च स्तरीय जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक विस्तृत आंतरिक जांच कमेटी गठित की गई है।
सहयोग का वादा: चेयरमैन ने कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए आवश्यक प्रक्रियागत सुधार भी किए जाएंगे।
शिकायत के अनुसार, शोषण और धर्मांतरण के प्रयास की ये घटनाएं फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच हुईं। 8 महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सहकर्मियों ने कार्यस्थल पर उन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया और उनका उत्पीड़न किया।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए और कंपनी द्वारा निलंबित किए गए आरोपियों में एक महिला एचआर (HR) मैनेजर भी शामिल है। अन्य आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
आसिफ अंसारी
शफी शेख
शाहरुख कुरैशी
रज़ा मेमन
तौसीफ अत्तार
दानिश शेख
नासिक पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इन आरोपियों का कोई बाहरी नेटवर्क था या अन्य महिला कर्मचारी भी इनका शिकार हुई हैं। फिलहाल 7 आरोपी हिरासत में हैं, जबकि मामले की कथित मास्टरमाइंड निदा खान अभी भी फरार बताई जा रही है।
निष्कर्ष: टाटा समूह की त्वरित कार्रवाई और चेयरमैन के कड़े संदेश ने यह साफ कर दिया है कि कंपनी अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर कायम है। अब सभी की नजरें SIT और आरती सुब्रमण्यन की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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