आखिर राजस्थान में किसानों के कर्ज माफ नहीं करने के लिए कौन जिम्मेदार है?

आखिर राजस्थान में किसानों के कर्ज माफ नहीं करने के लिए कौन जिम्मेदार है?

आखिर राजस्थान में किसानों के कर्ज माफ नहीं करने के लिए कौन जिम्मेदार है?
कांग्रेस सरकार चाहे, जितना दावा करे लेकिन सभी किसानों का 2 लाख रुपए का कर्ज भी माफ नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर काम की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डालते हैं।
अब कोई भी किसान कर्ज का भुगतान नहीं करना चाहता है।
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राजस्थान में किसानों की कर्ज माफी को लेकर 20 जनवरी को रात 8 बजे जी न्यूज के राजस्थान चैनल पर एक लाइव प्रोग्राम हुआ। इस प्रोग्राम में मैंने एक पत्रकार के तौर पर भाग लिया, जबकि मेरे साथ भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, कांग्रेस के विधायक जनाब रफीक खान और कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक बलवान पूनिया थे। आज का अटैक प्रोग्राम के एंकर संजय यादव रहे। हम सभी का यह मानना रहा कि राजस्थान में किसानों के कर्ज माफ होने चाहिए। कर्ज वसूली के लिए बैंक जो कृषि भूमि नीलाम कर रही है, उस पर भी रोक लगाने पर सहमति जताई गई। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनावी वादे के अनुरूप किसानों के कोऑपरेटिव सेक्टर के दो लाख रुपए तक के लोन माफ कर दिए हैं। इस पर सरकार ने 12 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। जबकि भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा का कहना रहा कि सम्पूर्ण कर्जमाफी का वादा कर कांग्रेस सत्ता में आई थी, इसलिए किसानों के सभी बैंकों के कर्ज माफ होने चाहिए। सीएम गहलोत ने एक और किसानों के कर्ज माफ नहीं किए, वहीं सरकार के आदेशों पर किसानों की कृषि भूमि नीलाम की जा रही है। भाजपा और कांग्रेस के अपने अपने तर्क हैं, लेकिन सवाल उठता है कि कर्ज माफी नहीं होने के लिए कौन जिम्मेदार है? कांग्रेस सरकार ने अब तक सिर्फ सेंट्रल को-ऑपरेटिव और भूमि विकास बैंक से जुड़े किसानों के दो लाख रुपए के लोन माफ किए हैं। लेकिन इन बैंकों से जुड़े सभी किसानों के लोन माफ नहीं हुए हैं। जिस किसान के कर्ज की राशि 2 लाख 5 हजार रुपए है, उस किसान का 2 लाख रुपए का कर्ज माफ नहीं हुआ है। यानी उन्हीं किसानों को फायदा मिला है, जिनके कर्ज की राशि दो लाख रुपए से कम हे। सवाल उठता है कि दस तक गिनती बोल कर राहुल गांधी ने क्या यही वादा किया था? राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन लेने वाले किसानों का तो दो लाख रुपए का लोन भी माफ नहीं हुआ है। सवाल उठता है कि जब राष्ट्रीयकृत बैंकों का लोन माफ करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है तो फिर कांग्रेस ने वादा क्यों किया? राष्ट्रीयकृत बैंकों के लोन माफ नहीं होने के लिए अब मुख्यमंत्री गहलोत केंद्र सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। वायदा कांग्रेस ने किया था, इसलिए किसानों लोन माफ करने की जिम्मेदारी भी कांग्रेस की ही है। जहां तक कृषि भूमि नीलामी पर रोक से संबंधित बिल का मामला है तो राज्यपाल कलराज मिश्र को राज्य सरकार के बिल पर निर्णय लेना चाहिए। दो वर्ष तक बिल को लंबित रखना राजभवन के कामकाज पर सवाल उठता है। इस मुद्दे पर सीएम गहलोत के अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन यह सही है कि अलवर और दौसा के किसानों की कृषि भूमि की नीलामी के आदेश गहलोत सरकार के उपखंड अधिकारियों ने ही बैंकों को दिए हैं। भाजपा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के हंगामे के बाद 20 जनवरी को जिस प्रकार सीएम गहलोत ने नीलामी रोकने और भविष्य में अनुमति नहीं देने के जो आदेश दिए, वे पहले भी दिए जा सकते थे। असल में सीएम गहलोत बड़ी चतुराई से सभी कार्यों का उत्तरदायित्व केंद्र सरकार पर डाल देते हैं। जब सभी काम केंद्र सरकार को करने है तो फिर राज्य सरकार की क्या जिम्मेदारी है? क्या उपखंड अधिकारियों को किसानों की कृषि भूमि नीलाम करने के आदेश केंद्र सरकार ने दिए थे।
अब कोई किसान लोन नहीं चुकाना चाहता:
राजनीतिक दल चुनाव में जो वादे करते हैं, उसे देखते हुए अब कोई भी किसान बैंकों का कर्ज नहीं चुकाना चाहता है। किसान को लगता है कि सत्ता के भूखे राजनीतिक दल आज नहीं तो कल लोन माफ कर ही देंगे। सरकार जब लोन माफ करने के लिए उतावली रहती हैं, तब किसान लोन का भुगतान क्यों करेगा? वर्ष 2018 में विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने जब किसानों के संपूर्ण कर्ज माफी की घोषणा की तो भाजपा सरकार की तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने भी सरकार के अंतिम दिनों में 50 हजार रुपए तक कृषि लोन माफ करने की घोषणा कर दी। चूंकि 50 हजार रुपए कांग्रेस के दो लाख रुपए से कम थे,इसलिए भाजपा दोबारा से सत्ता में नहीं आ सकी। सवाल उठता है कि जब किसान कर्ज ही नहीं चुकाएगा, तब बैंकों का क्या होगा?

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