केन्द्र सरकार से रबी फसलों के लिए पर्याप्त डीएपी आपूर्ति का आग्रह कृषि मंत्री ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री को लिखा पत्र

केन्द्र सरकार से रबी फसलों के लिए पर्याप्त डीएपी आपूर्ति का आग्रह कृषि मंत्री ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री को लिखा पत्र

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केन्द्र सरकार से रबी फसलों के लिए पर्याप्त डीएपी आपूर्ति का आग्रहकृषि मंत्री ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री को लिखा पत्र जयपुर, 5 अक्टूबर। कृषि मंत्री श्री लालचन्द कटारिया ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर राज्य को रबी फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में डीएपी आपूर्ति करने का आग्रह किया है। कृषि मंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार ने इस साल खरीफ के लिए गत अप्रेल से सितम्बर माह के दौरान माहवार आवंटन के माध्यम से 4.50 लाख मैट्रिक टन मांग के विरूद्ध केवल 3.07 लाख मैट्रिक टन डीएपी ही आपूर्ति की। साथ ही रबी 2021-22 के लिए अक्टूबर महीने में 1.50 लाख मैट्रिक टन मांग के विरूद्ध 67 हजार मैट्रिक टन डीएपी ही स्वीकृत की है, जिससे राज्य में डीएपी उर्वरक की अब तक 2.25 लाख मैट्रिक टन की कमी हो चुकी है।श्री कटारिया ने बताया कि राज्य सरकार शुरू से ही काश्तकारों को समय पर उर्वरक मुहैया कराने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने अगस्त माह में ही अर्ध शासकीय पत्र के माध्यम से केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री से इस संबंध में अनुरोध किया था। स्वयं उन्होंने भी सितम्बर में केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी तथा केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री को अर्ध शासकीय पत्र भेजकर मांग के मुताबिक डीएपी आपूर्ति करने का आग्रह किया था। इसके बाद सितम्बर माह में ही मुख्य सचिव ने केन्द्रीय उर्वरक सचिव को अर्ध शासकीय पत्र के माध्यम से अनुरोध किया था। साथ ही कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने भी केन्द्रीय उर्वरक सचिव को पत्र लिखकर एवं व्यक्तिशः उपस्थित होकर राज्य में डीएपी की कमी के कारण उत्पन्न स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी, परन्तु अभी तक राज्य को अपेक्षित मात्रा में डीएपी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।न्यूनतम 2 लाख मैट्रिक टन डीएपी की जरूरत कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य में 20 अक्टूबर तक सरसों व चना जैसी रबी फसलों की बुवाई होना निरन्तर जारी है। इन दोनों फसलों का औसतन क्षेत्रफल क्रमशः 30 लाख व 20 लाख हैक्टेयर रहने की आशा है, जिसके लिए विभागीय सिफारिश अनुसार न्यूनतम 2 लाख मैट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आवश्यकता रहेगी। उन्होंने बताया कि वांछित मात्रा में डीएपी उर्वरक प्राप्त नहीं होने से राज्य के दलहन एवं तिलहन उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है। एसएसपी के उपयोग की सलाहश्री कटारिया ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को वैकल्पिक फॉस्फेटिक उर्वरक सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके का उपयोग करने की सलाह दे रही है। काश्तकारों के मध्य इनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।—-

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