बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (सड़क, राजमार्ग, रेलवे, जल संसाधन) में जीओ-टेक्सटाईल्स के अनुप्रयोग से जुड़े डिजाइन/कमीशनिंग तकनीकी कर्मियों के कौशल प्रशिक्षण की पायलट परियोजना को वस्त्र मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई है। यह प्रशिक्षण (i) भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर, (ii) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास और (iii) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की द्वारा साथ-साथ आयोजित किया जाएगा। इंजीनियरिंग के संबंधित क्षेत्रों की समन्वयकरने वाली संकाय अन्य संबंधित केंद्रों/संबंधित संस्थान के कार्यालयों के साथ परामर्श करके विशेष पाठ्यक्रमों कोआयोजितकरेगी। मंत्रालय इन पाठ्यक्रमों के आयोजन से संबंधित सभी मामलों के लिए (ए) भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर के प्रोफेसर जी.आई.शिवकुमार बाबू (बी) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रासके प्रोफेसर राजगोपाल करपुरापुऔर (सी) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के प्रोफेसर सत्येंद्र मित्तल के साथ संबंधित संस्थानों के साथ तालमेल करेगा।
एक बैच में कम से कम75और अधिक से अधिक 100 उम्मीदवार होंगे। पायलट चरण के दौरानइन तीनों संस्थानों में से दो-दो बैच निर्धारित किये जाएंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के मिशन निदेशालय या वस्त्र मंत्रालय द्वारा समीक्षा के तहत विशेष कौशल विकास पाठ्यक्रम भी जारी रहेगा।
यह संस्थान इन पाठ्यक्रमों को ‘नो-प्रॉफिट/नो-लॉस’ के आधार पर आयोजित करेंगे। संस्थान इन पाठ्यक्रमों का विज्ञापन/प्रचार करेंगे और इच्छुक तथा योग्य उम्मीदवारों (जो प्रासंगिक शैक्षिक योग्यता रखते हों और इस क्षेत्र से संबंधित पर्याप्त अनुभव रखने वाले भारतीय नागरिक हों) से आवेदन आमंत्रित करेंगे। संस्थान प्रत्येक उम्मीदवार से 1,000रुपये टोकन शुल्क के रूप में लेगा। एक बार जब बैच (बैचों) में न्यूनतम 75उम्मीदवारों की संख्या तय हो जाएगी, तो वस्त्र मंत्रालय संबंधित संस्थान को प्रति बैच 4.50 लाख रूपये की पूरी राशि अग्रिम रूप से प्रदान करेगा। बैच/पाठ्यक्रम के पूरा होने बाद, संबंधित संस्थान मंत्रालय को व्यय/यूसी का विवरण प्रस्तुत करेगा तथा अधिशेष अनुदानयदि कोई हो, सरकार को वापस करेगा।
अपनी ओर से, वस्त्र मंत्रालय प्रशिक्षुओं को जुटाने के लिए केंद्र सरकार के अन्य संबंधित विभागों/राज्य सरकारों के साथ भी समन्वय स्थापित करेगा। संबंधित संस्थानों कोउपयुक्त उम्मीदवारों की व्यापक भागीदारी के लिए अपने-अपनेनेटवर्क (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म/पूर्व छात्र नेटवर्क सहित) का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
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एमजी/एएम/आईपीएस/एसएस
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