एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, पीवीएसएम एवीएसएम वीएम एडीसीवायुसेना प्रमुख (सीएएस) ने सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (सीएपीएस) द्वाराआयोजित “भारत-पाक युद्ध के 50 साल: हवाई क्षेत्र में विजय” विषय परस्वर्णिम विजय वर्ष समारोह के लिए स्मारक गतिविधियों के सिलसिले में नईदिल्ली में आज एक हाइब्रिड संगोष्ठी सह वेबिनार का उद्घाटन किया ।
वायुसेना प्रमुख का स्वागत एयर मार्शल अनिल चोपड़ा, पीवीएसएमएवीएसएम वीएम वीएसएम (सेवानिवृत्त), महानिदेशक सीएपीएस ने किया। इस अवसरपर वायुसेना प्रमुख द्वारा 1971 के सैन्य अभियान की रिकॉर्डिंग “द 1971 इंडो-पाक एयर वॉर: रिफ्लेक्शन्स एंड प्रोजेक्शन्स” नामक एक पुस्तक का भीविमोचन किया गया।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए वायुसेना प्रमुख ने 1971 केभूतपूर्व सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता जताई और प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा किउनकी उपस्थिति में बोलना उनके लिए एक विलक्षण सम्मान था। उन्होंनेबांग्लादेश वायु सेना की किलो फ्लाइट के अग्रणी सदस्यों में से एक ग्रुप कैप्टन शमसुल आलम, स्वाधीनता पदक, बीर उत्तम (सेवानिवृत्त) केयोगदान को भी स्वीकार किया और संगोष्ठी में शामिल होने के लिए उन्हेंधन्यवाद दिया। 1971 के भारत-पाक युद्ध को याद करते हुए वायुसेना प्रमुखने युद्ध रणनीति के संयुक्त अनुप्रयोग के पहलुओं, जो एक शानदार जीत हासिलकरने में सहायक थे, पर प्रकाश डाला। वायुसेना प्रमुख ने हवाई अभियान केमुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया और दुश्मन के आक्रमण, उसकी ताक़त और मज़बूत पहलुओं की धार को कुंद करने तथा नष्ट करने में भारतीय वायुसेना द्वारा निभाई गई महत्वपूर्णभूमिका को याद किया। सेमिनार के आयोजन के लिए सीएपीएस को धन्यवाद देते हुएवायुसेना प्रमुख ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम और पुस्तक विमोचनन केवल यादों को ताज़ा करेगा बल्कि भावी पीढ़ियों को प्रेरित करते हुएयुद्ध के बारे में हमारी समझ को भी बढ़ाएगा।
हाइब्रिड संगोष्ठी में प्रख्यात सैन्य इतिहासकारों, भूतपूर्वसैनिकों, वायुसेना के योद्धाओं और विद्वानों को एक साथ लाया गया, जिन्होंनेदिन भर कार्यवाही के माध्यम से युद्ध के उन विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्शकिया जिसने उप-महाद्वीप में इतिहास की दिशा बदल दी थी।
एमजी /एएम/ एबी
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