केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने बेंगलूरु के कॉफी बोर्ड मुख्यालय में कॉफी उत्पादकों, रोस्टरों, निर्यातकों एवं अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत बातचीत की। बैठक के महत्वपूर्ण नतीजे इस प्रकार हैं:
I. कॉफी अधिनियम का सरलीकरण:
वर्तमान कॉफी अधिनियम 1942 में अधिनियमित किया गया था और अब इसके कई प्रावधान अप्रासंगिक हो गए हैं जो कॉफी व्यापार में बाधा डाल रहे हैं। इसलिए बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस अधिनियम के प्रावधानों पर व्यापक तौर पर पुनर्विचार किया जाएगा और उन प्रावधानों को हटाया जाएगा जो प्रतिबंधात्मक अथवा नियामकीय प्रकृति के हैं ताकि एक सरल अधिनियम लाया जा सके जो कॉफी क्षेत्र की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप हो और उसके विकास के लिए अनुकूल हो।
II. सरफेसी अधिनियम:
कॉफी उत्पादकों ने सरफेसी अधिनियम के तहत बैंकों द्वारा जारी नोटिस के मद्देनजर अपनी जमीन खोने की चिंता जताई। माननीय मंत्री ने विस्तृत बातचीत के बाद उत्पादक समुदाय को आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ अनुकूल चर्चा की जाएगी और जल्द से जल्द एक उपयुक्त समाधान निकाला जाएगा।
III. परिवहन एवं विपणन सहायता योजना (टीएमए) के तहत अधिक मदद:
कई निर्यातकों ने चिंता जताई कि अंतरराष्ट्रीय फ्रेट दरों में वृद्धि के कारण भारतीय कृषि निर्यात कई जगहों के लिए गैर-प्रतिस्पर्धी हो गया है। यदि सरकार परिवहन एवं विपणन सहायता योजना (टीएमए) के तहत कृषि निर्यातकों को अधिक मदद नहीं करेगी तो भारत को कृषि निर्यात के लिए कई बाजार हमेशा के लिए खोना पड़ सकता है। माननीय मंत्री ने निर्यातकों को आश्वस्त किया कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए टीएमए योजना के तहत कम से कम एक वर्ष तक कृषि निर्यात सहायता के लिए एक विशेष पैकेज पर विचार किया जाएगा।
IV. कॉफी का मुद्दा
मंत्री ने कॉफी में व्हाइट स्टेम बोरर यानी सफेद तना छेदक कीट से कॉफी उत्पादकों से होने वाले नुकसान की गंभीरता को समझने और कॉफी बोर्ड की अनुसंधान शाखा के पास सीमित संसाधन होने के तथ्य पर विचार करते हुए उत्पादकों को आश्वस्त किया कि कॉफी व्हाइट स्टेम बोरर पर एक उन्नत शोध शुरू करने के लिए कृषि विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से अनुरोध किया जाएगा।
V. कॉफी ऋण के पुनर्गठन एवं ब्याज राहत के लिए विशेष पैकेज:
बैठक में कॉफी बोर्ड के अध्यक्ष ने मंत्री से अनुरोध किया कि वे सभी मौजूदा ऋणों को लंबी अदायगी अवधि के साथ एकल सावधि ऋण में पुनर्गठित करने की घोषणा करें। साथ ही उन्होंने कम ब्याज दर पर नई कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया।
मंत्री ने संकट के इस दौर में कॉफी उत्पादकों के साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों के साथ चर्चा में एक व्यवहार्य पैकेज तैयार करने का आश्वासन दिया।
VI. कॉफी बोर्ड की विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ करना:
मंत्री ने कॉफी बोर्ड को किसानों के खेतों में विस्तार कर्मियों द्वारा किए जाने वाले दौरे, कार्यशालाओं, प्रदर्शनों, सेमिनारों आदि सहित विस्तार गतिविधियों को रियल टाइम में अद्यतन करने के लिए एक डैशबोर्ड तैयार करने और उसकी प्रभावी निगरानी करने का निर्देश दिया।
बैठक में मंत्री ने हितधारकों की आशंकाओं को दमदार तरीके से दूर किया और उन्हें आश्वस्त किया कि भारत सरकार का कॉफी बोर्ड को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, कॉफी उत्पादकों, विशेष रूप से छोटे उत्पादकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए कॉफी बोर्ड को वाणिज्य मंत्रालय से कृषि मंत्रालय में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। इससे कृषि संबंधी सभी योजनाओं का लाभ कॉफी उत्पादकों को मिलना सुनिश्चित होगा।
कुल मिलाकर सभी कॉफी हितधारकों ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री को उनकी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जवाब देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने मंत्री को भी आश्वस्त किया कि वे कॉफी का उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे और कॉफी उत्पादकों को बेहतर रिटर्न दिलाने की दिशा में काम करेंगे।
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एमजी/एएम/एसकेसी
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