मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फिजिशियन डॉ. सुधीर भंडारी ने राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार भी संभाला।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फिजिशियन डॉ. सुधीर भंडारी ने राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार भी संभाला।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फिजिशियन डॉ. सुधीर भंडारी ने राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार भी संभाला।
डॉ. शिव सिंह राठौड़ भी मुख्यमंत्री के गृह जिले जोधपुर के हैं, इसलिए कार्यकाल पूरा होने तक राजस्थान लोक सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष रहेंगे।
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राजस्थान में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता और विधायक इस बात को लेकर बिलबिला रहे हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीति नियुक्ति नहीं कर रहे हैं,जबकि सरकार का तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा हो चुका है। प्रदेश में 40 से भी ज्यादा ऐसे सरकारी संस्थाएं हैं, जहां नेताओं को खपाया जा सकता है। मंत्री नहीं बनने वाले विधायकों को भी झंडे वाली कार और अन्य सुविधाएं दी जा सकती है। ऐसे नेता चाहे जितना बिलबिला लें लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने पसंदीदा व्यक्तियों को अच्छे पद देने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। 17 जनवरी को डॉ. सुधीर भंडारी ने जयपुर स्थित राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त पदभार भी संभाल लिया। डॉ. भंडारी पहले से ही प्रदेश के सबसे बड़े जयपुर स्थित सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल हैं। इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल का काम पहले ही बहुत ज्यादा और महत्त्वपूर्ण है, लेकिन फिर भी डॉ. भंडारी को विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया है। डॉ.भंडारी ने नया पद संभालने के बाद कहा कि वे दोनों संस्थानों के पदों का कार्य पूर्ण जिम्मेदार के साथ करेंगे। सवाल उठता है कि आखिर डॉ. भंडारी को ही विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। जानकारों के अनुसार डॉ. भंडारी पिछले बीस वर्षों से अशोक गहलोत के फिजिशियन हैं। डॉ.भंडारी की सलाह पर ही गत वर्ष अगस्त में अशोक गहलोत ने एसएमएस अस्पताल में ही अपने हार्ट की एंजियोग्राफी करवाई। एसएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिंसिपल होने के नाते डॉ. भंडारी ने सीएम गहलोत के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा। सीएम गहलोत अस्पताल से जब घर चले गए तो दूसरे दिन सबसे पहले मुलाकात करने वालों में डॉ. भंडारी शामिल थे। सब जानते हैं कि सीएम गहलोत कोरोना की दूसरे लहर में संक्रमित हुए थे और अब तीसरी लहर में भी संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। अभी तक सीएम गहलोत जयपुर के सरकारी आवास में ही आइसोलेट हैं। सीएम गहलोत का स्वास्थ्य अच्छा रखने में डॉ. भंडारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सीएम गहलोत ने भी कई अवसरों पर डॉ. भंडारी की योग्यता की प्रशंसा की है। अब जब गहलोत के स्वास्थ्य का इतना ख्याल रखा जा रहा है तो फिर डॉ. भंडारी को एक साथ दो-दों महत्त्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी मिलना स्वाभाविक हैं। ऐसा नहीं डॉ. भंडारी चिकित्सा के क्षेत्र में योग्य चिकित्सक नहीं है। डॉ. भंडारी वाकई एक योग्य और मेहनती चिकित्सक हैं। डॉ. भंडारी की तरह एसएमएस अस्पताल में और भी चिकित्सक हैं, लेकिन ऐसे चिकित्सक मुख्यमंत्री की फिजिशियन नहीं है।
डॉ. राठौड़ भी हैं कार्यवाहक अध्यक्ष:
मुख्यमंत्री गहलोत के गृह जिले जोधपुर का होना और मुख्यमंत्री से जान पहचान होने का फायदा भी मिलता रहता है। ऐसा ही एक उदाहरण राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य डॉ. शिव सिंह राठौड़ का है। डॉ. राठौड़ की नियुक्ति भाजपा के शासन में हुई थी। आयोग ने नियुक्त होने से पहले डॉ. राठौड़ जोधपुर में भाजपा नेता के तौर पर सक्रिय थे। डॉ. राठौड़ की शैक्षणिक योग्यता को देखते हुए ही तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राठौड़ की नियुक्ति आयोग के सदस्य के तौर पर की थी। आमतौर पर विरोधी दल की सरकार में नियुक्ति सदस्य को सत्तारूढ़ दल की सरकार आयोग का अध्यक्ष नहीं बनाती है। लेकिन डॉ. राठौड़ मुख्यमंत्री गहलोत के गृह जिले जोधपुर के हैं, इसलिए उन्हें आयोग का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. राठौड़ का कार्यकाल 29 जनवरी को पूरा हो रहा है। यानी तब तक डॉ. राठौड़ की आयोग के अध्यक्ष बने रहेंगे। भूपेंद्र यादव आयोग के अध्यक्ष पद से 2 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए थे और तभी से डॉ. राठौड़ कार्यवाहक अध्यक्ष का काम कर रहे हैं। कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले का होने के कारण राठौड़ को दो माह तक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। यदि राठौड़ जोधपुर के निवासी नहीं होते तो भूपेंद्र यादव की सेवानिवृत्ति के समय ही आयोग ने स्थाई अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी जाती। अब देखना होगा कि आयोग के अध्यक्ष के तौर पर सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. शिव सिंह राठौड़ सेवानिवृत्ति के बाद जोधपुर में किस तरह की भूमिका निभाते हैं। डॉ. राठौड़ की छवि साफ सुथरी और एक मेहनती कार्यकर्ता के तौर पर मानी जाती है।

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