कोर्ट ने कहा- नाबालिग का हाथ पकड़ना और प्यार का इजहार करना यौन उत्पीड़न नहीं, आरोपी को किया बरी
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक पॉक्सो कोर्ट ने कहा है कि किसी नाबालिग का हाथ पकड़ना और फिर उससे प्यार का इज़हार करना यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने इस मामले में 28 साल के एक शख्स को बरी भी कर दिया. साल 2017 में इस व्यक्ति ने एक नाबालिग लड़की को प्रपोज किया था. बता दें कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट को पॉक्सो कहा जाता है. पॉक्सो कोर्ट में 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर होने वाले यौन शोषण अपराधों की सुनवाई की जाती है. 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान किया गया है. साल 2018 में सरकार ने इस कानून में बड़े बदलाव किए थे.
अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये कहा जा सके कि आरोपी का कोई यौन उत्पीड़न का इरादा था. फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि इस बात का कोई अहम सबूत नहीं हैं कि आरोपी ने लगातार उसका पीछा किया था, उसे एक सुनसान जगह पर लेकर गया था. अदालत ने कहा, मैंने पाया कि अभियोजन पक्ष सबूत लाने में सक्षम नहीं है कि आरोपी ने कथित रूप से यौन उत्पीड़न की कोशिश की. यानी आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी किया जाता है.
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