शिक्षा मंत्रालय, एआईसीटीई और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद ने “गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा, प्रमाणन और शिक्षक विकास” पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। डॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पीएमओ और डीओपीटी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) वेबिनार के मुख्य अतिथि रहे।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की कल्पना के अनुरूप, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नए भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायता करेगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि पेशेवर डिग्री और पेशे से जुड़े विकल्पों के बीच तारतम्यता लाने की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में सत्यनिष्ठा लाने और सर्वश्रेष्ठ छात्रों को शिक्षण कार्य को पेशे के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की भी चर्चा की।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्राचीन काल से, शिक्षक शिक्षा के केंद्र में रहे हैं और देश की प्रगति में योगदान देते रहे हैं। उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षण से शैक्षिक परिणामों में सुधार आएगा और छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।
प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा, वीसी, सीसीएस विश्वविद्यालय; प्रो. सी.के. सलूजा, सेवानिवृत्त, सीआईई, दिल्ली विश्वविद्यालय; प्रो. एम. जगदीश कुमार, वीसी, जेएनयू; प्रो. पद्मा सारंगपाणि, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान; डॉ मैत्रेयी दत्ता (प्रमुख), कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़; राम्या वेंकटरमन, सीईएनटीए ने भी वेबिनार में हिस्सा लिया।
वेबिनार में (i) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षक विकास और (ii) प्रमाणन पर दो सत्र शामिल रहे। प्रो. एच.सी.एस. राठौर, पूर्व वीसी, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, और प्रो. महेंद्र पी. लामा, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जेएनयू ने प्रश्नों/उत्तरों/चर्चा में सहायता की और दोनों सत्रों का सारांश पेश किया।
वेबिनार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में डिजिटल के एकीकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भाषा के प्रभाव, शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने, समग्र शिक्षक विकास, भविष्य के शिक्षक, 21वीं सदी के कौशल विकास में शिक्षक की भूमिका, गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और प्रमाणन व शिक्षक प्रमाणन पर केंद्रित रहा।
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एमजी/एएम/आरकेएस
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