पारदर्शिता एवं सुशासन के लिए नागरिक सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी सुनिश्चित करें ः मुख्यमंत्री

पारदर्शिता एवं सुशासन के लिए नागरिक सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी सुनिश्चित करें ः मुख्यमंत्री

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा बैठक
पारदर्शिता एवं सुशासन के लिए नागरिक सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी सुनिश्चित करें ः मुख्यमंत्री
जयपुर, 10 अगस्त। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा है कि आमजन को सुशासन देना और सूचना तकनीक के उपयोग से घर बैठे सरकारी विभागों की समस्त सेवाओं की पहुंच सुलभ करवाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रकार की नागरिक सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए आगे बढ़ें। साथ ही, सभी विभाग इस साल 2 अक्टूबर तक अपनी समस्त योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारियां जन सूचना पोर्टल पर साझा कराएं। आईटी का उपयोग कर पारदर्शिता एवं सुशासन के लिए ऎसी पहल करने वाला राजस्थान पहला राज्य होगा।
श्री गहलोत मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों एवं बजट घोषणाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं एवं विद्यार्थियों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शैक्षिक संभाग स्तर पर इन्क्यूबेशन सेन्टर स्थापित किए जाएं तथा स्कूल स्तर तक स्टार्टअप्स गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाए।
श्री गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार स्टार्टअप्स गतिविधियों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन ऎसे कार्यक्रम अभी बड़े शहरों तक सीमित है। इसलिए आई-स्टार्ट की तर्ज पर रूरल आई-स्टार्ट कार्यक्रम शुरू करें और राज्य सरकार द्वारा खोले गए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के विद्यार्थियों, ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों, इनोवेटर्स, ग्रामीण उद्यमियों आदि को इनसे विशेष तौर पर जोडें़।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 181 हैल्पलाइन सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत करने वाले परिवादियों को बेहतर तरीके से संतुष्ट किया जाए। इसमें विभिन्न स्तरों पर मॉनीटरिंग की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें। श्री गहलोत ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने कोविड-19 महामारी के दौरान कोविड प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विभाग इस काम का डॉक्यूमेंटेशन करे।
मुख्य सचिव श्री निरंजन आर्य ने कहा कि सुशासन को निचले स्तर तक पहुंचाने के लिए सूचना तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण होता जा रहा है। जो लोग जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में  जागरूक बनाने की आवश्यकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री आलोक गुप्ता ने बताया कि विगत डेढ़ वर्ष में कोविड के दौरान मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फे्रंस के माध्यम से 500 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। महत्वपूर्ण सूचनाओं, दिशा-निर्देशों तथा कोविड प्रबंधन में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों और विशिष्टजनों को जोड़ने के साथ-साथ राजधानी से लेकर जिला तथा गांव-ढाणी स्तर तक वीसी के जरिए लगभग 6500 बैठकों और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन भी विभाग के माध्यम से किया गया है।
उन्होंने बताया कि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमितों की भर्ती, होम क्वारेंटाइन सुविधाओं, प्रवासियों के आवागमन, मजदूरों के रजिस्ट्रेशन, जरूरतमंद परिवारों एवं व्यक्तियों की आर्थिक मदद के लिए बैंक खातों में नकद राशि के हस्तान्तरण, रोगियों-संक्रमितों के लिए हेल्पलाइन जैसे अतिआवश्यक कार्यों को भी अंजाम दिया गया।
प्रमुख शासन सचिव वित्त श्री अखिल अरोरा ने बताया कि राज्य में रजिस्टर्ड स्टार्ट अप्स को विभिन्न विभागों में चयनित कार्यों के लिए 15 लाख रूपए तक के कार्यादेश बिना टेंडर प्रणाली के देने का निर्णय किया गया है। इससे स्टार्ट अप्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बैठक में आईटी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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