6 महीने बाद भी दो रेल इंजीनियरों को ही ठहराया दोषी, अभी भी चल रही जांच, अंडर ब्रिज में ट्रैकमैन की मौत का मामला
कोटा। न्यूज़. अंडर ब्रिज की मिट्टी ढहने से हुई ट्रैक मैन की मौत के मामले में दो रेल इंजीनियरों को दोषी ठहराने की बात सामने आई है। यह बात मंगलवार को पश्चिम- मध्य रेलवे जबलपुर मुख्यालय में हुई सेफ्टी मीटिंग में सामने आई। महाप्रबंधक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में रामगंजमंडी के सहायक मंडल इंजीनियर किरण पाल सेकेंडरी तथा रेल पथ इंजीनियर जीएल मीणा को प्राइमरी दोषी माना है।
जबकि मौके पर वरिष्ठ अधिकारी सहित रेलवे और नगर विकास न्यास (यूआईटी) के कई इंजीनियर भी मौजूद थे।
लेकिन घटना के 6 महीने बाद भी दो इंजीनियरों को ही दोषी ठहराने की बात सामने आई है। यूआईटी और रेलवे इंजीनियरों का इस सेफ्टी रिपोर्ट में कहीं जिक्र तक नहीं है।
6 महीने से चल रही है जांच
सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच 6 महीने से चल रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए यह जांच उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा कराई जानी चाहिए थी। लेकिन जूनियर अधिकारियों को मामले की जांच सौंप दी गई। यह जांच भी अभी तक पूरी नहीं हुई है। लेकिन मामले में दो इंजीनियरों को दोषी ठहराने की बात सामने आ चुकी है। जबकि मामले की जांच रेलवे बोर्ड और मुख्यालय की विजिलेंस टीम भी कर रही है।
यह है मामला
उल्लेखनीय है कि रेलवे द्वारा कोटा-डकनिया स्टेशनों के बीच अंडर पास बनाया जा रहा है। इस काम को यूआईटी द्वारा ठेके पर कराया जा रहा है। रेलवे यहां पर सिर्फ संरक्षा संबंधित काम देख रही है। काम के दौरान 3 मई को अंडर ब्रिज की मिट्टी ढह गई थी। इस मिट्टी में कई ट्रैकमेंटेनर दब गए थे। इनमें से एक ट्रैकमेंटेनर की मृत्यु हो गई थी तथा 2-3 घायल हो गए थे।
घटना के समय ऊपर चैन माउंटेन मशीन चल रही थी। जबकि नीचे गड्ढे में ट्रैकमेंटेनर काम कर रहे थे। घटना के समय मौके पर वरिष्ठ अधिकारी सहित रेलवे और यूआईटी के कई इंजीनियर मौजूद थे। इस मामले में उद्योग नगर थाने में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। जिसमें संभवत एफआईआर लगा दी गई है।
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