पानी की समस्या राजस्थान के कई क्षेत्रों में विकट है पर जहां कुछ क्षेत्रों में ये समस्या भौगोलिक कारणों से है तो कुछ क्षेत्रों में ये भौगोलिक के साथ साथ राजनीतिक और प्रशासनिक अकृणम्यता के कारण भी है इन्ही में से एक क्षेत्र है करौली जिले के सपोटरा और करणपुर डांग क्षेत्र
इस डांग क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव तो है ही साथ में पानी की समस्या व्याप्त हैं अभी गर्मियों के दिनो मे ये विकराल रूप धारण कर लेती है पानी के मुख्य स्रोत तालाब, पोखर, कुएं आदि सूख जाते हैं ।
भूमिगत जल स्तर भी बहुत नीचे चला जाता है इसलिए पीने के पानी भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है
इस क्षेत्र के लोगो को गर्मियों में पूरे दिन सिर्फ पानी जुटाने में लगना पड़ता है
वही के एक जानकर बताते है की सुबह 4 बजे से पूरे परिवार को पानी जुटाने के लिए निकलना पड़ता है कुछ किलोमीटर दूर एक कुआं है जहा से पानी का जुगाड करना पड़ता है, यहां तक की महिलाओं और बच्चों को 2 से 3 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पहाड़ चढ़कर पानी लाना पड़ता है जो बहुत ही जोखिम भरा है


उपरोक्त तस्वीर डांग क्षेत्र के ही आशा की है जहा किलोमीटर दूर एक कुआं है जहा से पानी लाना पड़ता है पर वो भी शुद्ध नहीं है ।
यहां तक की करौली से 30 किलोमीटर दूर एक गांव अलबत्की में पीने के पानी का स्रोत सिर्फ एक हैंडपंप रह गया है जो वहा के 70 घरों की प्यास बुझाता है

ये तस्वीर बता रही है की पानी की प्यास इस दुर्गम पहाड़ से भी ऊंची है जिसको पार करके महिलाए पानी ला रही है
एक अजीब तरह की समस्या का सामना और करना पड़ता है इस क्षेत्र के लोग को की मूलभूत सुविधाओं के अभाव में
बाहर के गांवों के लोग यहां से शादी भी नही करते है इसके चलते यहां के युवाओं को पलायन अपनाना पड़ता है

डांग क्षेत्र के लगभग 30 गांवों में हैं ये समस्या
इनमे कुछ ये है आशा की , आराम की निभेरा , राहर , मरमदा, मोरेची, पटोरन नैनिया की, पहाड़पुरा, चोडिया की, कल्याणपुरा, अलबतकी, करौली क्षेत्र के गुरदेह , लांगरा, भांकरी आदि गांव है जहां ये समस्या है
अब आते है इस समस्या के मुख्य कारणों पर :
ये क्षेत्र राजनीतिक रूप से अक्रिय है , यहां राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों को इस क्षेत्र से मतलब सिर्फ चुनावो तक ही रहता है यह से दो बार सांसद रहे मनोज राजोरिया जिन्होंने आजतक क्षेत्र को देखा तक नहीं है
वही सबसे ज्यादा समस्या सपोटरा के डांग क्षेत्र में है जहा से तीन बार विधायक है रमेश चंद मीना जो एक बार कैबिनेट मंत्री तक रह चुके है पर खुद के क्षेत्र की समस्याओं से अवगत नहीं है या दृष्टि नही देते है
और इन्ही कारणों से प्रशासन भी अक्रमण्यीय हो गया है जो सिर्फ राजनीतिक हितों के हिसाब से कार्य करता है
इस बार जब लोगो द्वारा मांग उठाई गई तो प्रशासन ने कागजों में 28 गांवों में टैंकर जारी कर दिए पर लोगो तक पानी के टैंकर नही पहुंचे है
ठेकदारों ने खुद के निजी उपयोग के लिए उनका उपयोग कर रहे है पर प्रशासन ने होने को तो 4 पंचायतों के 27 गांवों में 48 टैंकर जारी कर दिए है पर अभी तक 20 गांवों में एक भी टैंकर नही पहुंचा है
और लोगो को पहले की तरह की पानी की समस्या से जूझना पड़ता है
गौरतलब है की चंबल नदी से सिर्फ 30 km के भीतर के गांवों को ये समस्या है लेकिन वही चंबल से 100 km दूर भी गांवों में चंबल लिफ्ट परियोजना से पानी पहुंच रहा लेकिन नजदीक के गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है
कारण सिर्फ राजनीतिक और प्रशासनिक अनदेखी और निक्रमण्यता जिन्हे इस क्षेत्र से खास मतलब नही है
क्षेत्र के युवा एक चंबल लिफ्ट परियोजना की मांग कई बार उठा चुके है
#डांगमांगेचंबल_पानी हैशटैग से ट्विटर पर भी कई बार इस मांग को रखा गया पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है
वहीं के एक संगठन @ddo dang development organization ने कई बार कहा है की सरकार सिर्फ एक लिफ्ट परियोजना से इस क्षेत्र की समस्या को दूर कर सकती है
वर्तमान में सरकार ने इस क्षेत्र के लोगो को प्रकृति की दया पर छोड़ रखा है , अच्छी खासी बरसात होने पर ही इनकी पानी की समस्या अल्प समय के लिए दूर होती है
कई बार मांग उठाने के बाद भी सरकार , जनप्रतिनिधियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है
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