काश! सेना के पांच जवानों की शहादत पर भी अरदास हो।

काश! सेना के पांच जवानों की शहादत पर भी अरदास हो।

काश! सेना के पांच जवानों की शहादत पर भी अरदास हो।
12 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में अरदास का एक बड़ा आयोजन हुआ। दावा किया जारहा है कि इसमें एक लाख किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि विगत दिनों चार किसानों की मौत पर सिर्फ परंपरा के अनुरूप अरदास का प्रोग्राम रखा गया है। इस प्रोग्राम में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी भाग लिया। किसी भी व्यक्ति के निधन पर प्रार्थना सभा या अरदास का आयोजन करने में कोई बुराई नहीं है। ऐसे आयोजन मृतक की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं। भारतीय किसान यूनियन ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए अरदास का बड़ा आयोजन कर एक अच्छी पहल की है। उम्मीद है कि किसान यूनियन इस पहल को जारी रखेगी। 11 अक्टूबर को ही आतंकियों ने कश्मीर में हमारी सेना के पांच जवानों को शहीद कर दिया। आतंकियों ने पहले धोखे से जवानों को बुलाया और फिर गोली मार दी। शहीद होने वाले जवानों के नाम जसविंदर सिंह, सरज सिंह, गज्जन सिंह, मनदीप सिंह और विशेख एच है, पांच में से चार जवान सिक्ख समुदाय से जुड़े हैं, इनमें से तीन पंजाब के रहने वाले हैं। इन जवानों शहीद तब किया गया, जब वे देश की रक्षा कर रहे थे। हमारे जवान देश की रक्षा इसलिए करते हैं, भारत के नागरिक सुरक्षित रहे। जवानों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कुछ लोग देश की मुख्य सड़कों पर बैठ कर रास्ता जाम करते हैं। जवानों का मकसद तो अपने सभी देशवासियों को महफूज रखना होता है। नागरिकों को कोई नुकसान न हो, इसलिए वे सीमा पर सीना तानकर खड़े रहते हैं। कश्मीर घाटी में आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने में भी हमारे जवान पीछे नहीं रहते। 11 अक्टूबर को जो पांच जवान शहीद हुए उन सभी की उम्र 25 वर्ष के करीब है। यानी सेना में नई नई नियुक्ति हुई थी। किसी का विवाह हाल ही में हुआ, तो किसी जवान का विवाह होने ही वाला था। उन माता-पिता का आंसू नहीं रुक रहे हैं, जिसका बेटा शहीद हुआ है। जवानों की शहादत वेदना से भरी है। जवानों के लिए भी अरदास की जाती है, तो उनकी आत्मा को शांति मिलेगी ही, साथ ही उन आतंकियों को भी जवाब दिया जा सकेगा, जिन्होंने कायराना अंदाज में गोली मारी है। देखना है कि आतंकियों को जवाब देने में राकेश टिकैत, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेता किस तरह की पहल करते हैं।

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