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रविवार को ‘मुख्यमंत्री निरोगी राजस्थान चिरंजीवी स्वास्थ्य’ शिविरों का शुभारंभ, चिकित्सा मंत्री करेंगे शुरूआतचिकित्सा सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लिया तैयारियों का जायजाजयपुर, 13 नवंबर। प्रदेश में 14 नवम्बर से 31 मार्च तक संचालित होने वाले ‘मुख्यमंत्री निरोगी राजस्थान चिरंजीवी स्वास्थ्य’ शिविरों के आयोजन की तैयारियों के संबंध में शनिवार को स्वास्थ्य शासन सचिव श्री वैभव गालरिया ने स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ.रघु शर्मा रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य स्तर से मुख्यमंत्री निरोगी राजस्थान चिरंजीवी स्वास्थ्य शिविरों का शुभारंभ करेंगे। ये शिविर प्रदेश के समस्त ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित होंगे।चिकित्सा मंत्री इस अवसर पर बांसवाडा, भरतपुर, हनुमानगढ, जोधपुर, उदयपुर, अलवर, सवाईमाधोपुर, अजमेर एवं बारां जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों से सीधा संवाद करेंगे एवं शिविर आयोजन के अनुभव साझा करेंगे।स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि यह अभियान आमजन को उचित उपचार उपलब्ध करवाने के उद्धेश्य से संचालित किए जा रहे हैं। विशेषकर ग्रामीणजनों को इन स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से बाल रोग, स्त्रीरोग, नेत्र रोग, दंत रोग, आयुष विशेषज्ञों की उपचार-जांच सेवाओं के अतिरिक्त 48 तरह की खून की जांच, टीबी,लीवर संबंधी रोग, पेट संबंधी, गुर्दा, मलेरिया, ईसीजी, कॉमन कैंसर, प्रसवपूर्व जांचे,सिलीकोसिस व कुष्ठ रोगों इत्यादि गंभीर रोगों की जांच सुविधा भी ग्राम पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध करवायी जायेगी।श्री गालरिया ने बताया कि इन शिविरों में गंभीर रोगों से ग्रसित रोगियों की पहचान कर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों पर सर्जरी-उपचार हेतु रैफर किया जायेगा।शिविर में इंटरनेट के माध्यम से ई-टेली कंसलटेंसी के जरिए सुपर स्पेशलिटी व स्पेशलिस्टों की ऑनलाईन कंसलटेंसी सेवा हेतु जोड़ा जायेगा। इसके लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल के पांच सुपर स्पेशलिस्ट एवं स्वास्थ्य भवन से 10 विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवाएं टेलीकंसलटेंसी के लिए पूरी अभियान अवधि के लिए उपलब्ध रहेंगी।स्वास्थ्य शासन सचिव ने प्रत्येक शिविर की सूचना प्रत्येक ग्रामीण तक पहुंचाने के व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिये। उन्होंने शिविरों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आशा सहयोगिनियों, स्वास्थ्य मित्रों, कोविड सहायकों सहित स्थानीय स्वयं सेवी संस्थानों, मीडियाकर्मियों एवं पंचायती राज संस्थानों के जनप्रतिनिधियों का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त करने पर बल दिया।श्री गालरिया ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों व संभाग के संयुक्त निदेशकों से व्यक्तिगत चर्चा कर तैयारियों की जानकारी की। उन्होंने बताया कि जिले में उपलब्ध राजकीय स्वास्थ्य मानव व चिकित्सकीय संसाधनों का समुचित उपयोग इन ग्रामीण शिविरों में सुनिश्चित किया जाये। विशेषज्ञ चिकित्सकों व तकनीकी सहायकों की कमी होने की स्थिति में निर्धारित दैनिक मानदेय के आधार पर निजी क्षेत्रों के कार्मिकों की व्यवस्था यथाशीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने महिलाओं एवं आयुष सेवा के उपचार के लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच के लिए प्रत्येक शिविर स्थल पर पृथक से व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया।बैठक में मिशन निदेशक श्री सुधीर कुमार शर्मा, निदेशक आईईसी व अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम श्री मेघराज सिंह रतनू, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. के.के.शर्मा, अतिरिक्त निदेशक डॉ.अशोक परमार, डॉ.रवि शर्मा सहित समस्त स्टेट नोडल ऑफिसर व चिकित्सा विभाग के समस्त संयुक्त संभाग निदेशक, सीएमएचओ, बीसीएमओ एवं अन्य चिकित्साअधिकारीगण मौजूद रहे।
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