अत्यधिक विशेषाधिकार प्राप्त और सबसे कमजोर तबके के बीच न्याय की पहुंच के अंतर को पाटना सबसे जरूरी: भारत के मुख्य न्यायाधीश

अत्यधिक विशेषाधिकार प्राप्त और सबसे कमजोर तबके के बीच न्याय की पहुंच के अंतर को पाटना सबसे जरूरी: भारत के मुख्य न्यायाधीश

‘भारत में न्याय हासिल करना महज एक आकांक्षापूर्ण लक्ष्य नहीं है। इसे व्यावहारिक वास्तविकता बनाने के लिए हमें सरकार के विभिन्न अंगों के साथ मिलजुलकर काम करने की आवश्यकता है।’ भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (नालसा) के मुख्य संरक्षक श्री एन. वी रमण ने आज नई दिल्ली में यह बात कही।
एक हाइब्रिड कार्यक्रम में नालसा के विजन एवं मिशन ब्यौरे और कानूनी सेवा मोबाइल एप्लीकेशन को जारी करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, यदि हम कानून के शासन द्वारा चलने वाले समाज के रूप में बने रहना चाहते हैं, तो हमारे लिए अत्यधिक विशेषाधिकार प्राप्त और सबसे कमजोर तबके के बीच न्याय की पहुंच के अंतर को पाटना बहुत जरूरी है। इस कार्यक्रम में देश भर से पदाधिकारी शामिल हुए।

नालसा की भूमिका और उसकी पहल की सराहना करते हुए श्री एन. वी रमण ने कहा, डाक नेटवर्क की मौजूदा सेवाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग निशुल्क कानूनी सहायता सेवाओं की उपलब्धता के बारे में जागरुकता फैलाने और पात्र वर्ग,खासतौर पर देश के ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक कानूनी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।सभी डाकघर जागरूकता फैलाने और कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए नालसा से जुड़े रहे हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘डाकघर और पोस्टमैन द्वारा दी जाने वाली सेवाएं उन लोगों के बीच की खाई को पाट देंगी, जो भौगोलिक बाधाओं के कारण न्याय तक पहुंच से वंचित हैं। ये ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच के विभाजन को कम करेंगी।‘
इस अवसर पर नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री यू.यू. ललित ने कानूनी सेवा संस्थानों के कर्तव्यों के बारे में विस्तार से बताया और इस बात पर जोर दिया कि अगर हमें देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचना है, तो यह डाकघरों के माध्यम से ही होना चाहिए।

इस कार्यक्रम में दोनों गणमान्य अतिथियों ने डिस्प्ले पोस्टर भी जारी किए। इन्हें निशुल्क कानूनी मदद और सहायता की उपलब्धता के बारे में सूचना प्रसारित करने के लिए देश भर के सभी डाकघरों में लगाया जाएगा।

आज जारी किया गया विजन एवं मिशन ब्यौरा नालसा के उस दृष्टिकोण को समाहित करता है, जो एक समावेशी कानूनी प्रणाली को बढ़ावा देने और हाशिए पर रहने वालों तथा वंचितों के लिए निष्पक्ष एवं सार्थक न्याय सुनिश्चित करने वाला है।यह समाज में हाशिए पर रहने वालों और छोड़ दिए गए समूहों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने के नालसा के मिशन को कानूनी रूप से उपलब्ध लाभों और पात्र लाभार्थियों को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व, कानूनी जानकारी एवं जागरुकता प्रदान कर बढ़ावा देता है।
एंड्रॉइड फोन के लिए कानूनी सेवा मोबाइल एप्लीकेशन में कानूनी मदद खोजना, कानूनी सलाह और अन्य शिकायतों की मांग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।एप्लीकेशन ट्रैकिंग सुविधा और स्पष्टीकरण मांगने जैसी कुछ अतिरिक्त सुविधाएं हैं, जो कानूनी मददका लाभ पाने वालों तथा कानूनी सेवा प्राधिकरणों, दोनों के लिए उपलब्ध हैं।
इस ऐप के जरिये लाभार्थी संस्थान पूर्व मध्यस्थता के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।ऐप के जरिये पीड़ित मुआवजे के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इस ऐप को जल्द ही आईओएस और क्षेत्रीय भाषाओं में लांच किया जाएगा।
एमजी/एएम/एएस

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