राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना के स्वास्थ्य लाभ पैकेज में संशोधन किया

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना के स्वास्थ्य लाभ पैकेज में संशोधन किया

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबीपीएम-जेएवाई) को लागू करने के लिए शीर्ष संस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने योजना के तहत स्वास्थ्य लाभ पैकेज  मास्टर में बदलाव किए हैं। स्वास्थ्य लाभ पैकेज (एचबीपी 2.2) के संशोधित संस्करण में एबीपीएम-जेएवाई के तहत कुछ स्वास्थ्य पैकेजों की दरों को 20 प्रतिशत से लेकर 400 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। लगभग 400 प्रसीजर्स दरों को संशोधित किया गया है और ब्लैक फंगस से संबंधित एक नया अतिरिक्त चिकित्सा प्रबंधन पैकेज भी जोड़ा गया है। एचबीपी 2.2 के नवंबर 2021 से शुरू होने की उम्मीद है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि स्वास्थ्य लाभ पैकेज का संशोधित संस्करण आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों को मजबूत करेगा। ऑन्कोलॉजी के लिए संशोधित पैकेज देश में कैंसर के रोगियों की देखभाल को और बेहतर बनाएगा। ब्लैक फंगस से संबंधित नए पैकेजों के जुड़ने से लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। मुझे यकीन है कि तर्कसंगत एचबीपी निजी अस्पतालों में योजना के क्रियान्वयन में और सुधार करेगा जिससे लाभार्थियों पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।”

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के सीईओ डॉ. आर एस शर्मा ने आश्वासन दिया कि एनएचए स्वास्थ्य लाभ पैकेज मास्टर को जायज बनाने के लिए हितधारकों से प्राप्त फीडबैक पर लगातार काम करता है। आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत के बाद से ज्यादा से ज्यादा बीमारियों को कवर करने के लिए नए पैकेज जोड़े गए हैं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए पैकेजों की दरों में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। योजना को प्रभावी तौर पर लागू करने के लिए इन बदलावों की जरूरत है। साथ ही इस योजना की लाभ देश के अलग अलग हिस्सों में लेने में आसानी के लिए लेनदेन प्रबंधन प्रणाली (टीएमएस) को भी मजबूत किया गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसियां ​​(एसएचए) जो वर्तमान में एचबीपी के किसी भी पिछले संस्करण को लागू कर रही हैं, वे अब एचबीपी 2.2 के नवीनतम संस्करण को अपना सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि एनएचए हितधारकों और प्रख्यात चिकित्सा संस्थानों के प्रतिष्ठित प्रोफेसरों से निरंतर सलाह ले रहा है।

एनएचए ने निम्नलिखित श्रेणियों में दरों में संशोधन किया है:

i) रेडिएशन ऑन्कोलॉजी प्रसीजर्स,

ii) चिकित्सा प्रबंधन प्रसीजर्स जैसे डेंगू के लिए प्रसीजर, एक्यूट फेबराइल संबंधी बीमारी आदि।

iii) ब्लैक फंगस के लिए सर्जिकल पैकेज उपचार,

iv) अन्य प्रसीजर्स जैसे राइट/लेफ्ट हार्ट कैथीटेराइजेशन, पीडीए क्लोजर, आर्थ्रोडिसिस, कोलेसिस्टेक्टोमी, एपेंडिसेक्टोमी आदि।

चिकित्सा प्रबंधन प्रसीजर्स के तहत वेंटिलेटर के साथ आईसीयू की दरों में 100 प्रतिशत, बिना वेंटिलेटर के आईसीयू के लिए दरों में 136 प्रतिशत, एचडीयू के लिए दरों में 22 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि रूटीन वार्ड के लिए कीमतों में 17 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

वर्तमान में आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई में 1669 उपचार प्रसीजर्स हैं, जिनमें से 1080 सर्जिकल, 588 मेडिकल और एक अन्य पैकेज है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत, आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई का उद्देश्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करना और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को मुफ्त और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।

2018 में, आयुष्मान भारत योजना को कुल 1,393 पैकेजों के साथ एचबीपी 1.0 के साथ लॉन्च किया गया था। इस योजना का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी)-2011 आंकड़ों के अनुसार 10.74 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों (53 करोड़ से अधिक लाभार्थी) को प्रति परिवार 5 लाख रुपये सालाना तक मुफ्त और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।

योजना की शुरुआत के बाद से 2.2 करोड़ से अधिक पात्र लाभार्थियों को 24,000 पैनलबद्ध स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं (ईएचसीपी) के विशाल नेटवर्क के माध्यम से लाभ मिल चुका है। लाभार्थियों को बीमारियों और चिकित्सा स्थितियों के उपचार के लिए माध्यमिक, तृतीयक और डे-केयर प्रसीजर्स के लिए स्वास्थ्य कवरेज प्रदान की गई है। स्वास्थ्य लाभ पैकेज आयुष्मान भारत योजना की रीढ़ है। यह न केवल प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे को परिभाषित करता है बल्कि लाभार्थियों को वित्तीय जोखिम संरक्षण की सीमा भी निर्धारित करता है। इस प्रकार एचबीपी को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें ज्यादा जोखिम वाली, ज्यादा फैलने वाली और वे बीमारियों कवर हो जाती हैं जो मरीज की जेब पर ज्यादा भारी पड़ती हैं।

एमजी/एएम/पीजी

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