एल्गार परिषद केस में NIA के आरोपपत्र में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का जिक्र, लेकिन PM को मारने का नहीं
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार 15 लोगों को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने सहित 16 अपराधों के साथ गिरफ्तार करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें अधिकतम मौत की सजा है. इस महीने की शुरुआत में स्पेशल कोर्ट में दायर किए गए आरोपों के ड्राफ्ट में एनआईए ने कहा है कि आरोपियों ने एक पब्लिक फिगर को मारने के लिए परिष्कृत हथियारों को हासिल करने की साजिश रची थी.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मामले की शुरुआती जांच करने वाली पुणे पुलिस ने आरोपों के अपने मसौदे में कहा था कि आरोपियों द्वारा हथियार हासिल करने का प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश से जुड़ा था. हालांकि एनआईए ने अपने मसौदे में प्रधानमंत्री का जिक्र नहीं किया है. लेकिन एक एनआईए अधिकारी ने कहा कि मसौदे में किसी विशिष्ट आरोप का जिक्र नहीं है, लेकिन इससे जुड़ा सबूत ट्रायल का हिस्सा होगा.
हालांकि पुणे पुलिस ने दावा किया था कि उसने इन आरोपों के संबंध में एक पत्र बरामद किया है. आरोपी एक्टिविस्ट रोना विल्सन ने मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से संपर्क किया था और एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि सबूत आपत्तिजनक हैं और इन्हें 2018 में उनकी गिरफ्तारी से दो साल पहले एक मॉलवेयर के जरिए उनकी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में प्लांट किया गया था.
एनआईए ने जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए हैं; उनमें सुधीर धवले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गॉडलिंग, शोमा सेन, महेश राऊत, पी. वरवरा राव, वर्नोन गोंजाल्वेज, अरुण फेरिरा, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, हैनी बाबू, रमेश गायचोर, ज्योति जगताप और सुरेंद्र गोरखे भी शामिल हैं. जांच एजेंसी ने अपने मसौदे में फादर स्टैन स्वामी का भी जिक्र किया है, जिनकी पिछले महीने मौत हो गई थी. हालांकि उनके खिलाफ मामला रोक दिया गया है. इसके अलावा मामले में अन्य लोगों का जिक्र है, जिन्हें फरार करार दिया गया है.
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