सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल कंपनियों की एजीआर देनदारी की दोबारा गणना करने की मांग खारिज कर दिया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली बेंच ने भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज की याचिकाओं को खारिज कर दिया।
उल्लेखनीय है कि 1 सितंबर, 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल कंपनियों को दस सालों में बकाया डेढ़ लाख करोड़ की एजीआर देनदारी का भुगतान करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर टेलीकॉम कंपनियां सालाना किश्त का भुगतान नहीं करती हैं तो उन्हें अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। सालाना किश्त जमा करने की अंतिम तिथि हर साल 7 फरवरी को होगी। कोर्ट ने कहा था कि टेलीकॉम कंपनियों की जो बैंक गारंटी है, वो जारी रहेगी और कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर को ये अंडरटेकिंग देना होगा कि वे किश्तों के भुगतान संबंधी आदेश का पालन करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान टेलीकॉम कंपनियों का स्पेक्ट्रम बेचा जाएगा कि नहीं, इस पर फैसला एनसीएलटी करेगा।
24 अक्टूबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर की सरकारी परिभाषा को सही बताते हुए टेलीकॉम कंपनियों को 92,000 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया था। कंपनियों का कहना था कि एजीआर में सिर्फ लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम चार्ज आते हैं जबकि सरकार रेंट, डिविडेंड, संपत्ति बेचने से लाभ जैसी कई चीजों को भी शामिल बता रही थी।
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