ओलंपिक खिलाड़ी शिवपाल सिंह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे, परमवीर चक्र स्वर्गीय कैप्टन मनोज पांडे समेत अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी

ओलंपिक खिलाड़ी शिवपाल सिंह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे, परमवीर चक्र स्वर्गीय कैप्टन मनोज पांडे समेत अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी

ओलंपिक में भाला फेंकने वाले खिलाड़ी शिवपाल सिंह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा किया, जो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान की मौन गवाही देता है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित एक स्मारक है। भारतीय सशस्त्र बलों की कर्तव्य पालन में दृढ़ निष्ठा, वीरता और बलिदान की एक लंबी परंपरा है। यह स्मारक, भारत के सभी नागरिकों के लिए एक विरासत स्थल के रूप में इंडिया गेट के पास स्थित है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के कर्मचारियों ने ओलंपिक खिलाड़ी का स्वागत किया और उन्हें युद्ध स्मारक के बारे में जानकारी दी। निदेशक के शब्दों में, इस स्मारक की परिकल्पना आगंतुकों के मन में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए की गई है। यह स्मारक इस विशाल राष्ट्र के नागरिकों को उन बहादुर सैनिकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करेगा, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

श्री सिंह, जो 2016 से भारतीय वायु सेना में एक जूनियर वारंट अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, को सेना के एक अधिकारी द्वारा स्थल के चारों ओर ले जाया गया, जिसमें उन्हें पाकिस्तान और चीन के खिलाफ विभिन्न सशस्त्र संघर्षों तथा अन्य ऑपरेशन जैसे 1961 के गोवा ऑपरेशन, श्रीलंका में ऑपरेशन पवन एवं ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन राइनो जैसे सभी आतंकवाद रोधी ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए सशस्त्र बलों के कर्मियों के नाम दिखाए गए, जो स्वर्ण अक्षरों में स्मारक की दीवारों पर अंकित हैं।

शिवपाल सिंह ने कहा, “सशस्त्र सेना के जवान के रूप में, इस यात्रा ने मुझे वास्तव में बहुत भावुक कर दिया है, क्योंकि यह स्थान मृत्यु तक समर्पण की भावना की याद दिलाता है, जिसने हमेशा भारतीय सैनिकों को सभी भारी बाधाओं के खिलाफ अंतिम व्यक्ति से लड़ने और आखिरी गोली चलाने के लिए प्रेरित किया है। इन बलिदानों के कारण, हम आज यहां सुरक्षित हैं।

स्मारक-स्थल का क्षेत्रफल 40 एकड़ है और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2019 में किया गया था। इसकी संरचना चार चक्रों के रूप में है, जो महाभारत की ‘चक्रव्यूह’ अवधारणा को दर्शाती है और इसके साथ ही यह संरचना सशस्त्र बलों के विभिन्न मूल्यों की भी प्रतीक है।

26000 से अधिक शहीदों के नाम व्यक्तिगत रूप से त्याग चक्र (बलिदान चक्र) नामक वृत्ताकार संकेंद्रित दीवारों की प्रत्येक ग्रेनाइट ईंट में लिखे हुए हैं।

बाद में, भारतीय खेल प्राधिकरण के एनएस एनआईएस पटियाला केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे एथलीट शिवपाल सिंह ने 1/11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट के परम वीर चक्र, स्वर्गीय कैप्टन मनोज पांडे को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो श्री सिंह के समान ही उत्तर प्रदेश राज्य के रहने वाले थे।

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एमजी/एएम/जेके/डीए                                           

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