अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में इजाफे का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिल रहा है। तेल विपणन कंपनियों ने लगातार दूसरे दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्रमश: 27 पैसे और डीजल में 23 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली और कोलकाता में पेट्रोल का भाव शनिवार को 96 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया।
इंडियन ऑयल की वेबासइट के अनुसार देश के चारो महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में पेट्रोल की कीमत बढ़कर क्रमश: 96.12 रुपये, 102.30 रुपये, 97.43 रुपये और 96.06 प्रति लीटर हो गयी है। वहीं, इन महानगरों में डीजल भी क्रमश: 86.98 रुपये, 94.39 रुपये, 91.64 रुपये और 89.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। गौरतलब है कि 4 मई से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कभी लगातार तो कभी रुक-रुक कर बढ़ोतरी हुई है। पिछले 24 दिनों में पेट्रोल 5.80 रुपये प्रति लीटर और डीजल 6.20 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मांग बढ़ने से इसकी कीमत में उछाल आया है। अमेरिकी बाजार में एक दिन पहले कारोबार बंद होते समय ब्रेंट क्रूड 0.38 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 72.69 डॉलर प्रति बैरल हो गया था। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 0.83 डॉलर बढ़कर 70.91 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।
पेट्रोल और डीजल की कीमत ऑल टाइम हाई पर हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पेट्रोल 107 रुपये और डीजल 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को भी पार कर गया है। पेट्रोल और डीजल के महंगा होने की वजह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के भाव में आई उछाल मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई उछाल से निश्चित रूप से पेट्रोल-डीजल की कीमत पर असर पड़ता है, लेकिन भारत में इनकी आसमान छूती कीमतों की मुख्य वजह इन पर लगने वाला भारी भरकम टैक्स है।
पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स की वजह से आम उपभोक्ता परेशान हैं। इसी वजह से कई बार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की मांग की जा चुकी है। लेकिन इस मांग को लेकर केंद्र और राज्यों की सरकारों के बीच एक राय नहीं बन पाने की वजह से इस मसले पर अभी तक फैसला नहीं किया जा सका है
जीएसटी काउंसिल की 40वीं बैठक में कुछ राज्यों की ओर से इस मसले को उठाया भी गया था, लेकिन पंजाब, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और केरल के वित्त मंत्रियों के कड़े विरोध की वजह इस पर कोई फैसला नहीं हो सका था और इस विषय को आगे के लिए टाल दिया गया था। इसके बाद जीएसटी काउंसिल की 28 मई को हुई 43वीं बैठक में भी पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की मांग उठी थी, लेकिन कोरोना के रोकथाम के लिए काम आने वाले चिकित्सीय उपकरणों और दवाओं पर लगने वाली जीएसटी की दर में कटौती के भारी भरकम मुद्दे के आगे पेट्रोल और डीजल का मुद्दा एक बार फिर पीछे छूट गया। जीएसटी काउंसिल की आज होने वाली बैठक में भी इस विषय पर चर्चा होने की उम्मीद कम ही है।
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