राजस्थान के एडीजी (एसीबी) दिनेश एनएम ने जब धाराप्रवाह संस्कृत के श्लोक बोले तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

राजस्थान के एडीजी (एसीबी) दिनेश एनएम ने जब धाराप्रवाह संस्कृत के श्लोक बोले तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

शास्त्रों को समझने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान जरूरी। युद्ध क्षेत्र में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए ज्ञान में जीवन के हर सवाल का जवाब है।
राजस्थान के एडीजी (एसीबी) दिनेश एनएम ने जब धाराप्रवाह संस्कृत के श्लोक बोले तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
विदेशी भाषाओं से लेकर दक्षिण भारत की भाषाओं में भी संस्कृत के शब्दों का उल्लेख है।
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संस्कृत के ज्ञाताओं से जब हम वेदों और हमारे धर्म शास्त्रों के बारे में सुनते है तो अच्छा लगता है। लेकिन जब ऐसी ज्ञान की बातें संस्कृत के श्लोक के साथ एक पुलिस अधिकारी की जुबान से सुना जाए तो आश्चर्य होता है। ऐसा ही आश्चर्य 22 अगस्त को जयपुर में संस्कृत अकादमी द्वारा आयोजित अमृत महोत्सव के कार्यक्रम में राजस्थान के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसीबी) दिनेश एनएम को सुनकर हुआ। किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि दक्षिण भारतीय एक पुलिस अधिकारी को संस्कृत भाषा और हमारे शास्त्रों के बारे में इतनी जानकारी होगी। दिनेश एनएम को भले ही हिन्दी के उच्चारण में परेशानी होती हो, लेकिन संस्कृत भाषा पर उनकी पूरी पकड़ है। दिनेश को संस्कृत भाषा का ज्ञान ही नहीं बल्कि संस्कृत के माध्यम से हमारे शास्त्रों में लिखे को समझने की समझ भी है। समारोह में दिनेश ने कहा कि यूं तो हमारे वेदों का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। लेकिन यदि वेदों को सही मायने में समझना है तो संस्कृत भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। संस्कृत से ही हम वेदों की मूल भावना को समझ सकते हैं। युद्ध क्षेत्र में जब अर्जुन ने भगवान कृष्ण से पूछा, मैं अपने रिश्तेदारों के विरुद्ध ही क्यों लडू?तो भगवान कृष्ण ने जिस तरह मनुष्य के जीवन का सार बताया, उससे अच्छा तरीका और कोई नहीं हो सकता था। युद्ध क्षेत्र में भगवान कृष्ण द्वारा दिया गया ज्ञान ही जीवन का सबसे बड़ा सार है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों से लेकर चीन तक की अपनी संस्कृति हैं और उनकी संस्कृति के ग्रंथ भी हैं, लेकिन भारत के वेदों का कोई मुकाबला नहीं है। विदेशी संस्कृति के ग्रंथों में भी संस्कृत के शब्दों का उल्लेख है। दिनेश एनएम जब गीता के श्लोक संस्कृत भाषा में सुना रहे थे, तब लोगों ने तालियां बजा कर दिनेश की योग्यता की तारीफ की। उन्होंने माना कि दक्षिण भारत की तमिल, कन्नड़, तेलगु आदि भाषाओं में भी संस्कृत का उपयोग होता है। संस्कृत न केवल हमें विद्वान बनाती है बल्कि शास्त्रों को समझने की शक्ति भी देती है। जो लोग संस्कृत से प्रेम रखकर हमारे वेदों को समझना चाहते हैं उन्हें दिनेश एनएम का यह वीडियो जरूर देखना चाहिए। वीडियो को सुनने से लगेगा कि वे किसी धर्मशास्त्री का ज्ञानवर्धक भाषण सुन रहे हों। संस्कृत भाषा और शास्त्रों के बारे में इतना ज्ञान होने के संबंध में दिनेश ने बताया कि उनकी प्राथमिक शिक्षा कर्नाटक के चिकलादापुर के एक गांव में गुरुकुल नुमा स्कूल में हुई थी। स्कूली शिक्षा से ही संस्कृत भाषा पढऩे का अवसर मिला। मैंने महाभारत और रामायण का संस्कृत भाषा में ही अध्ययन किया है। इसलिए मुझे संस्कृत के श्लोक याद रहते हैं। पुलिस सेवा की व्यस्तता के बाद भी मुझे वेद पढ़ना अच्छा लगता है।

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