CM रावत व केंद्र सरकार ने आपदा में शिकार होने वाले लोगों के परिवार को मुआवजा देने का किया ऐलान
उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमखंड टूटने से नदियों में आयी बाढ़ से क्षतिग्रस्त एनटीपीसी की निर्माणाधीन 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड पनबिजली परियोजना की एक सुरंग में अभी 150 के करीब लोगों के फंसे होने की आशंका है. जबकि अभी तक 16 लोगों का रेस्क्यू हो चुका है, तो वहीं 10 लोगों के शव मिले हैं. इस बीच उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस आपदा में जान गंवाने लोगों के परिवार वालों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है. वहीं इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवार को PMNRF से 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार मुआवजे का ऐलान किया है.
इसके अलावा सीएम रावत ने कहा कि हमारी सेना के लोग वहां पहुंच गए हैं. एनडीआरएफ की एक टीम दिल्ली से यहां पहुंची है. मेडिकल सुविधा की दृष्टि से वहां सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेज और हमारे राज्य के डॉक्टर कैंप किए हुए हैं. जबकि हमने वहां का हवाई सर्वे किया. इसके बाद रेणी गांव जहां तक जाया जा सकता है, वहां तक रोड से जाकर जायजा लिया है. इससे पहले रावत ने बताया कि आईटीबीपी के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर 150 मीटर तक पहुंचे हैं. जबकि यह सुरंग लगभग 250 मीटर लंबी है.
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, 13 मेगावाट के ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट में 35 लोग काम करते थे और सभी लापता हैं. इसके अलावा उत्तराखंड पुलिस के दो जवान भी लापता हैं. जबकि तपोवन पॉवर प्रोजेक्ट में 176 श्रमिक काम कर रहे थे. वहीं, अपनी 180 भेड़ और बकरियों के साथ 5 स्थानीय चरवाहे भी बाढ़ में बह गए हैं. हम मान रहे हैं कि लगभग 125 लोग लापता हैं. हालांकि यह संख्या अधिक हो सकती है.
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