पानी में बहुत कम घुलनशील बहु-वानस्पतिक सत्त्वों को कमरे के सामान्य तापमान पर नैनो-एनकैप्सुलेशन की नई प्रौद्योगिकी का उपयोग करके उनकी घुलनशीलता को बढ़ाया जा सकता है

पानी में बहुत कम घुलनशील बहु-वानस्पतिक सत्त्वों को कमरे के सामान्य तापमान पर नैनो-एनकैप्सुलेशन की नई प्रौद्योगिकी का उपयोग करके उनकी घुलनशीलता को बढ़ाया जा सकता है

नैनो-औषधि निर्माण के लिए एक तापमान और प्रवाह नियंत्रण अल्ट्रासोनिक स्प्रे (टीएफओसीयूएस) प्रणाली दवाओं के वानस्पतिक (हर्बल) अवयवों की जैव उपलब्धता को बढ़ाकर ऐसी हर्बल दवाओं की गुणवत्ता और प्रभाव में सुधार ला सकती है। यह उपकरण महंगे फाइटोमोलिक्यूल्स वाली दवाओं की लागत में कमी लाकर उनकी चिकित्सीय उपयोगिता एवं प्रभावकारिता में सुधार कर सकता है।
 
पारंपरिक रूप से औषधियों में वानस्पतिक (हर्बल) चिकित्सीय संघटकों की मात्रा में विभिन्नता और उपयोग किए जाने के बाद उनका असमान अवशोषण सामने आता है। इनके आमाशय में रहने की कम अवधि और पाचन प्रणाली से उत्सर्जित होने (बाहर निकलने) का अलग-अलग समय इन दवाओं की जैव उपलब्धता को सीमित कर सकता है। वे तापमान और वायुमंडलीय आर्द्रता (नमी) की दृष्टि से भी अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। उनकी नमी ग्रहण करने की (हाइग्रोस्कोपिक) प्रकृति इस औषधि के अवयव कणों की परस्पर सम्मिश्रण प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है जिससे पानी में इनकी घुलनशीलता बहुत कम होने लगती है जिससे शरीर की द्रव परिसंचरण प्रणाली में इनका विसरण अच्छी तरह से नहीं हो पाता।
 
ऐसी कमियों को दूर करने के लिए हर्बल दवाओं को नैनो-वाहकों (कैरियर्स) के रूप में उपयुक्त समझे जाने वाले बायोपॉलिमर कैप्सूल्स के भीतर डाला जा सकता है। नैनोकैरियर आमाशय और पाचन तन्त्र के भीतर अपेक्षाकृत बहुत अधिक समय तक बने रह सकते हैं और इस दौरान वे पेट में अधिक मात्रा में दवाई छोड़ सकते है। इसके अलावा नैनोकैरियर्स में उपयोग के लिए कैप्सूल में रखी जाने वाली औषधि की आवश्यक मात्रा एक गोली (टैबलेट) की तुलना में बहुत कम होती है। इस कारण से इसे महंगे फाइटोमोलेक्यूल्स का उपयोग करते समय यह तकनीक बहुत काम की हो जाती है। फाइटोमोलिक्यूल्स के श्रेष्ठतम उपयोग से उत्पाद की लागत में कमी आने के साथ ही  उसकी चिकित्सीय प्रभावकारिता में सुधार आता है।
 
इसे ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान परिषद-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएस आईआर-सीएसआईओ), चेन्नई केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एस प्रभाकरन ने भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी कार्यक्रम की सहायता से तापमान और प्रवाह नियंत्रण अल्ट्रासोनिक स्प्रे (टीएफओसीयूएस) प्रणाली का एक नया प्रोटोटाइप विकसित किया है और पानी में कम घुलनशील वानस्पतिक सत्त्वों (अवयवों) की कोलाइडल स्थिरता को बढ़ाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ इसे जोड़ दिया है।
आदर्श (मॉडल) औषधि के रूप में टाइप-II मधुमेह के उपचार के लिए उपयोग किए जाने वाले वाणिज्यिक आयुर्सुलिन कैप्सूल का उपयोग करके इस प्रोटोटाइप को मान्य किया गया है। जैव-उपलब्धता टीएफओसीयूएस प्रणाली को बढ़ाने के लिए बहुलक (पॉलिमर) [जेडईआईएन/पीवीए] का उपयोग करके सभी पांच वानस्पतिक अवयवों को नैनों कैप्सूलों के भीतर डालना पड़ेगा। प्रत्यक्ष रूप में वानस्पतिक अवयवों (सत्त्वों) की तुलना में कैप्सूल में डाले गए नमूने आकारिकी, नैनो मापन सीमा ( नैनोस्केल रेंज) और पानी में अच्छे कोलाइडल निलंबन होने पर  गोलाकार थे। एक कोलाइडल स्थिर नैनोकैरियर सिस्टम विकसित करने के लिए एक व्यवहार्यता अध्ययन किया गया था जिसमें कर्कुमा लोंगा, एंड्रोग्राफिस, पैनिकुलता, टिनोस्पोरा, कॉर्डिफोलिया, एजेले मार्मेलोस, एम्ब्लिका ऑफिसिनैलिस जैसे वानस्पतिक (हर्बल) सत्त्वों के मिश्रण को समान अनुपात में विभिन्न प्रकार के वॉल पॉलिमर का उपयोग करके नैनो केसुल के रूप में विकसित किया गया था।
 
टीएफओसीयूएस प्रणाली के प्रोटोटाइप ने कमरे के तापमान पर तेजी से प्रतिक्रिया पानी प्रक्रिया में नैनो कैप्सुलिकृत जैव स्थिर बहुलक (नैनोएनकैप्सुलेशन बायोकंपैटिबल पॉलीमर) का उपयोग करके पानी में बहुत कम घुलनशील बहु-वानस्पतिक (हर्बल) सत्त्वों की घुलनशीलता को इस प्रकार बढ़ाया जो तापमान के प्रति संवेदनशील चिकित्सीय सक्रिय अवयवों के साथ संयोजित किया जा सकता है।
 
ध्वनिक गुहिकायन (एकॉस्टिक कैविटेशन) पर आधारित यह अद्वितीय नैनो-औषधि कण संश्लेषण प्रणाली वर्तमान माइक्रोएन्कैप्सुलेशन तकनीकों जैसे कि मैकेनिकल स्टिरर असिस्टेड एंटीसॉल्वेंट एडिशन विधि, स्प्रे ड्राई मेथड्स की तुलना में  कम बिजली की खपत के साथ हाई-प्रेशर होमोजेनाइजेशन मेथड प्रोडक्शन, रैपिड रिएक्शन टाइम के साथ तेजी से नमूना तैयार करने के लिए अग्रणी है उनकी तुलना में निरंतर बड़े पैमाने पर अच्छे परिणाम प्रदान कर सकती है। यह परिवर्तनीय संचलन (ऑपरेटिंग) तापमान (10 डिग्री सेल्सियस से 80 डिग्री सेल्सियस) पर बहु-वानस्पतिक (हर्बल) अवयवों का नैनोसाइज-एनकैप्सुलेशन करने में सक्षम है। नियंत्रण प्रवाह दर, तापमान और अल्ट्रासोनिक ऊर्जा द्वारा कणों के आकार और आकार को नियंत्रित करने में आसानी के साथ ही उपयोग आसान है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है और अभी यह प्रौद्योगिकी टीआरएल-4 के चौथे चरण में तैयार किया जा रहा है।
 
डॉ. प्रभाकरण के अनुसार वाणिज्यिक उपयोग के लिए इस प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए “औषधि (फार्मास्युटिकल) और खाद्य उद्योग और वैज्ञानिक उपकरण निर्माण उद्योगों ने अपनी रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि हम केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) चेन्नई केंद्र से उद्भवन केंद्र (इन्क्यूबेशन सेंटर) और प्रणाली संचालन (सिस्टम ऑपरेशन) और नई औषधि निर्माण के अनुकूलन के लिए जनशक्ति प्रशिक्षण भी प्रदान करेंगे।’’ उन्होंने प्रौद्योगिकी के और उन्नयन के लिए बीएएल रिसर्च फाउंडेशन (बीआरएफ) बैंगलोर के साथ करार   किया है।
 

तापमान और प्रवाह नियंत्रण अल्ट्रासोनिक स्प्रे टीएफओसीयूएस प्रणाली के कार्यशील प्रोटोटाइप में शामिल हैं (i) सोनोहॉर्न जांच के साथ अल्ट्रासोनिक बिजली की आपूर्ति (ii) इनलेट और आउटलेट के साथ डबल वॉल ग्लास रिएक्टर (iii) आरटीडी तापमान जांच (iv) माइक्रोकंट्रोलर आधारित निगरानी और नियंत्रण मॉड्यूल (v) पेरिस्टाल्टिक पंप 1 और 2 (vi)  रिएजेंट बोतल 1 (विलायक) और 2 प्रति-विलायक (एंटी-सॉल्वेंट) (vii) सोलनॉइड वाल्व और (viii) रिएक्टर की स्थिति को सहायता देने और समायोजित करने के लिए मैकेनिकल असेंबली (ix)परिसंचारी जल धावक (सर्कुलेटिंग वॉटर बाथ) I
 
टीईएम छवि  गोलाकार आकार में जेडईआईएन एनकैप्सुलेटेड वानस्पतिक (हर्बल) सत्त्वों को दिखाती है, इनकी  आकार सीमा 80 से 260 एनएम है (बाएं) और पीवीए की एसईएम छवि आकार में गोलाकार वानस्पतिक (हर्बल) सत्त्व, 110 से 380 एनएम की आकार सीमा है (दाएं, स्केल बार 5 माइक्रोन)।
 
अधिक जानकारी के लिए डॉ. एस. प्रभाकरन (prabhakarans@csio.res.in) से संपर्क किया जा सकता है।
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एमजी/एएम/एसटी/एसएस  

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