केंद्रीय वस्त्र, वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज दिल्ली में भारतीय तकनीकी वस्त्र संघ (आईटीटीए) के प्रतिनिधियों से बात करते हुए कहा कि तीन वर्षों में तकनीकी वस्त्रों के निर्यात में पांच गुना वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्यों में कपड़ा क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) का समर्थन करेगा और कपड़ा निर्माण के लिए सस्ती जमीन तथा बिजली जैसे सस्ते बुनियादी ढांचे की पेशकश करेगा।
उनके अनुप्रयोगों के क्षेत्र के आधार पर, भारत में तकनीकी वस्त्र खंड को 12 उप-खंडों में विभाजित किया गया है। पैकेजिंग टेक्सटाइल्स (पैकटेक) (38%), जियोटेक्निकल टेक्सटाइल्स (जियो-टेक) (10%), एग्रीकल्चरल टेक्सटाइल्स (एग्रोटेक) (12%) में भारत की प्रमुख उपस्थिति है। नई सामग्री के आगमन के साथ तकनीकी वस्त्रों के अनुप्रयोग दिन-ब-दिन व्यापक होते जा रहे हैं। स्मार्ट वस्त्रों में किए गए नए आविष्कारों के साथ; 3-डी वीविंग, हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए स्मार्ट वियर और अल्ट्रा-हाई परफॉर्मिंग स्पोर्ट्सवियर नए रास्ते खोल रहे हैं जो कुछ साल पहले अकल्पनीय थे।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को अनुसंधान परियोजनाएं प्रदान की गई हैं। अनुसंधान के विषयों में अत्याधुनिक तकनीक शामिल हैं जैसे; स्वदेशी कार्बन फाइबर, कार्बन कंपोजिट से इलेक्ट्रिक वाहन बॉडी, अल्ट्रा स्ट्रेंथ बुलेट प्रूफ जैकेट सामग्री, तकनीकी वस्त्रों के उपयोग के माध्यम से फॉग हार्वेस्टिंग, बायो ऑर्गनिज्म के लिए अत्यधिक सुरक्षा आदि।
तकनीकी वस्त्रों में अनुसंधान, नवाचार और विकास समिति (प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, नीति आयोग के सदस्य (एस एंड टी) सह-अध्यक्षता में) ने अब तक 36 प्रस्तावों पर विचार किया है और 20 प्रस्तावों की सिफारिश की है। समिति की आगामी बैठकों में चर्चा के लिए लगभग 40 और शोध प्रस्ताव विचाराधीन हैं।
आईटीटीए तकनीकी वस्त्र विनिर्माण के छोटे और मध्यम खंड का एक संघ है। उनके 90% सदस्यों का वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये से कम है। आईटीटीए के सदस्य ज्यादातर गैर-बुने हुए कपड़े, सुरक्षात्मक वस्त्र, पैकेजिंग तकनीकी वस्त्र, कृषि-वस्त्र, औद्योगिक फिल्टर, वाहक पट्टा के निर्माण कार्य में लगे हुए हैं।
गारवेयर, वेलस्पन, एसआरएफ, सेंचुरी यार्न, जॉनसन एंड जॉनसन आदि जैसे बड़े तकनीकी वस्त्र निर्माता (500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाला) आईटीटीए से जुड़े नहीं हैं। वस्त्र मंत्रालय अपने अधिकांश नीति निर्माण, कार्यक्रमों में आईटीटीए से परामर्श करता है और उन्हें नियमित रूप से कार्य सौंपता है।
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एमजी/एएम/केसीवी/वाईबी
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