दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न  ‘जैविक खेती, कृषि के नवाचार भी हो सकते हैं ग्राम विकास योजना का हिस्सा‘

दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न ‘जैविक खेती, कृषि के नवाचार भी हो सकते हैं ग्राम विकास योजना का हिस्सा‘

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दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न ‘जैविक खेती, कृषि के नवाचार भी हो सकते हैं ग्राम विकास योजना का हिस्सा‘जयपुर, 23 नवंबर। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को तैयार करने के लिए विशेष रूप से आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं मे गली-सड़क, पेयजल के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नवाचार, जैविक खेती पशुपालन विकास जैसी योजनाएं भी अनुमोदित की जा सकती हैं। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा इस विषय पर पंचायती राज प्रतिनिधियों के क्षमता संवर्धन किया जा रहा है। इस क्रम में पंचायती राज मंत्रालय, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी पीआर), हैदराबाद और इन्दिरा गांधी पंचायती राज संस्थान  (आईजीपीआरएस) जयपुर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। जन योजना अभियान के माध्यम से पेसा राज्यों के ‘आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन‘ के लिए इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जीपीडीपी योजना की प्रक्रिया, क्रियान्वयन और निगरानी पर राज्य के अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, मंडल पंचायतों के सदस्यों के साथ जीवंत चर्चा की गई।मंत्रालय के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कार्यशाला के दूसरे दिन पेसा राज्यों के विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधानों, सरपंचों ने प्रतिभागियों के साथ बागवानी, शून्य-बजट खेती, जैविक खेती, मत्स्य पालन, डेयरी उत्पादन में वृद्धि और वर्मी कम्पोस्ट के प्रभावी उपयोग आदि नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की। जमीनी स्तर के प्रतिनिधियों द्वारा आय सृजन और अपशिष्ट रहित खेती करने के लिए रचनात्मक व्यावसायिक विचार प्रस्तुत किए।अधिकारियों ने बताया कि ग्राम सभाओं मे इन विषयों पर विचार-विमर्श कर ऎसे नवाचारों के प्रचार-प्रसार को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में शामिल किया जा सकता है। कार्यशाला में विशेष रूप से सक्षम कर्मियों की भागीदारी को बढ़ावा देने और विशेष क्षमता वाले लोगों के विकास और सशक्तिकरण से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा हुई। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण और ग्राम सभाओं को अधिक से अधिक जीवंत बनाने और उनमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। महानिदेशक आईजीपीआरएस श्री रविशंकर श्रीवास्तव ने केन्द्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों की योजनाओं के व्यावहारिक दृष्टिकोण और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में इनके अभिसरण पर चर्चा की। पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती रेखा यादव ने समावेशी और समग्र विकास योजनाओं के निर्माण तथा इनके निष्पादन में गुणवत्ता और नीतिगत हस्तक्षेप और त्रुटि रहित डेटा संकलन पर जोर दिया। उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों का लाभ उठाकर भावी योजनाओं के लिए आईईसी गतिविधियों, संबंधित विभागों की भागीदारी और साक्ष्य-आधारित योजना तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया। शासन सचिव पंचायती राज श्री. पी.सी. किशन और अतिरिक्त निदेशक आईजीपीआरएस श्री राजेंद्र सिंह कैन ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यशाला में 8 राज्यों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। महाराष्ट्र, आंध्र, तेलंगाना, उड़ीसा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात राज्यों के सरपंचों की बड़ी संख्या में भागीदारी की और अपने अनुभव और अच्छी पद्धतियों को साझा किया।कार्यशाला में ग्रामीण विकास मंत्रालय, पीएफआरडीए (अटल पेंशन योजना), यूनिसेफ, यूएनएफपीए और कुदुम्ब श्री एनआरओ के अधिकारी भी उपस्थित थे। जीपीडीपी में विभिन्न स्कीमों के अभिसरण और ग्रामीण विकास के सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए सर्वाेत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई। 

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