केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री; लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अन्तरिक्ष मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने आज यहां कहा कि 21 वीं सदी में मौजूद अवसरों को 20 वीं सदी की मानसिकता के साथ नहीं भुनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो युवा पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय हैं, अब यह महत्वपूर्ण हो गया है कि वे अपनी मानसिकता को समय के अनुरूप बदलें ताकि 21वीं सदी में भारत के समक्ष मौजूद अवसरों का भरपूर लाभ उठा सकें।
जम्मू विश्वविद्यालय द्वारा “अमृत महोत्सव” के अंतर्गत जोरावर सिंह सभागार में “भारत के 100 वर्षों में युवाओं का योगदान” विषय पर आयोजित सम्मेलन/विचार विमर्श के सत्र में मुख्य भाषण देते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक मानसिकता में बदलाव नहीं किया जाता है तब तक नए अवसरों से अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के भारत की महत्वाकांक्षा सर्वोच्च स्तर पर है और इस समय युवाओं का मंत्र होना चाहिए आकांक्षा, नवाचार और प्रतिस्पर्धा।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया में कोई भी सरकार अपने देश के प्रत्येक युवा को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान जिम्मेदार सरकार ने आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए कई पहल की हैं जो सरकारी नौकरी से भी अधिक आकर्षक हैं। लेकिन नए अवसरों का उपयुक्त लाभ उठाने के लिए आवश्यकता है कि अपनी मानसिकता को सरकारी नौकरी के चंगुल से मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए माता-पिता को भी शिक्षित होने की जरूरत है और साथ ही राजनेताओं और नेताओं को भी सरकारी नौकरी का झूठा आश्वासन देने से खुद को रोकने की आवश्यकता है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अपनी आजादी के 75वें वर्ष का उत्सव मना रहा है और भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने से पहले, अगले 25 वर्षों के लिए रोड मैप तैयार करने का समय आ गया है। आज भारत के युवाओं के समक्ष एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर और विशेषाधिकार मौजूद है जब वे 2047 में स्वाधीन भारत के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत के निर्माण और विश्व समुदाय में इसे एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में योगदान करने में सक्षम हैं।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत के युवाओं के समक्ष सबसे बड़ा सुअवसर यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने तेजी से प्रगति की है जिसे पूरी दुनिया स्वीकार करती है और आज भारत को एक ताकत के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दुनिया में कहीं भी सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय राष्ट्राध्यक्ष के रूप में सार्वभौमिक और सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में हर पीढ़ी के युवाओं का योगदान होता है और इस योगदान की प्रकृति उस दौर से निर्धारित होती है जिसमें वह पैदा हुआ है और जिस मानसिकता से देश गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय, उस युग के युवाओं को भारत की स्वतंत्रता को बनाए रखने और इसे एक प्रगतिशील लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थिर बनाने की चुनौती सौंपी गई थी, जब दुनिया के कई लोकतंत्र ढह रहे थे और सर विंस्टन चर्चिल सहित कई राजनीतिक विद्वानों ने यह भविष्यवाणी की थी कि भारत में एक लोकतंत्र के रूप में 50 वर्षों तक भी जीवित रहने की क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, आज 2021 के युवाओं पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 7 वर्षों में जो उपलब्धियां प्राप्त कीं है और पिछले 70 वर्षों में जो चूक हुई उसकी भरपाई करने की जिम्मेदारी है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारतीय युवाओं के सामने एक विशेषाधिकार है कि वे अपने जीवन के अगले सक्रिय वर्षों को 100 वर्षों के स्वाधीन भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं और वे अपने बच्चों को यह बताने में सक्षम होंगे कि 100 वर्ष के नए भारत के वास्तुकार के रूप में उनका भी योगदान है, भले ही वह कम या ज्यादा है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से लेकर नवाचार, जैव प्रौद्योगिकी में अन्य सभी देशों से आगे है। कोविड महामारी से निपटने में भारत न केवल पहली डीएनए वैक्सीन की खोज करने वाला देश बना बल्कि टीके का पर्याप्त उत्पादन कर रहा है और अन्य देशों को इसका निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अब इस पीढ़ी के युवाओं से अगले 25 वर्षों में आने वाली पीढ़ियों के लिए विश्व में भारत को शिखर पर स्थापित करने की उम्मीद की जाएगी।
डॉ जितेंद्र सिंह के सम्बोधन के बाद एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। दो घंटे के इस सत्र में विभिन्न विभागों और विषयों के विद्वानों, छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। डॉ जितेंद्र सिंह ने प्रत्येक प्रतिभागी को विस्तार से जवाब दिया और संवाद सत्र को अत्यधिक समृद्ध और पारस्परिक रूप से सीखने का अनुभव बताया।
जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार धर ने स्वागत भाषण दिया जबकि प्रोफेसर नरेश पाधा ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। इस अवसर पर प्रोफेसर रजनी ढींगरा ने भी अपने विचार रखे। संवाद सत्र का संचालन रजनी शर्मा ने किया।
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एमजी /एएम/ डीटी/एके
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