उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने टीबी उन्‍मूलन के लिए भारत के प्रयासों के बारे में सांसदों को जागरूक करने के लिए आयोजित कार्यक्रम की अध्‍यक्षता की

उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने टीबी उन्‍मूलन के लिए भारत के प्रयासों के बारे में सांसदों को जागरूक करने के लिए आयोजित कार्यक्रम की अध्‍यक्षता की

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति श्री वेंकैया नायडू ने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के साथ टीबी उन्‍मूलन के लिए देश के प्रयासों के बारे में सांसदों को जागरूक बनाने के लिए आज आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार ने देश में टीबी (क्षय रोग) की स्थिति के बारे में दर्शकों को अवगत कराया। उन्‍होंने जैसा कि 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कल्पना की थी, वर्ष 2025 तक इस बीमारी का तेजी से उन्‍मूलन करने की जरूरत के बारे में जानकारी दी।

 
सांसदों को इस संवेदनशील प्रक्रिया में उपस्थित होने के लिए धन्यवाद देते हुए उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि केंद्र, राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर समन्वय से इस कार्य को जन आंदोलन बनाने में मदद मिलेगी और वर्ष 2025 तक टीबी का उन्‍मूलन करने के हमारे प्रयासों में तेजी आएगी। पूरे देश में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की बढ़ती पहुंच के कारण इस मोर्चे के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में आजादी के बाद से बहुत ही महत्वपूर्ण प्रगति अर्जित की गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि टीबी निदान और उपचार के माध्यम से वर्ष 2000 से अब तक 63 मिलियन लोगों की जान बचाई गई है। उन्होंने सांसदों से सरकारी कार्यक्रमों की उचित योजना और निष्‍पादन के लिए अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में एक लक्ष्य का निर्धारण करने और टीबी का उन्‍मूलन करने में मदद करने का आह्वान किया। सांसदों ने टीबी मुक्‍त भारत का संकल्‍प भी लिया।
 

 
लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने टीबी के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई करने का आह्वान करते हुए विविधता से भरे देश में संदेश के प्रसार में संसद द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में टीबी के मरीजों की लगातार पहचान और निगरानी हो तथा उपचार के दौरान और उसके बाद ऐसे रोगियों की जरूरतों पर ध्‍यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सुचारु शासन और स्वास्थ्य प्रशासन के लिए सांसदों को टीबी से संबंधित सभी आवश्यक आंकड़ों के साथ सरकार से सभी प्रकार की सहायता उपलब्‍ध कराई जाएगी।
 

 
अपने संबोधन में श्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वास्‍थ्‍य को विकास से जोड़कर देश की सोच को ‘व्यापक’ विषय बनाने की दिशा में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कुपोषण को लक्षित करने वाले कार्यक्रमों के साथ-साथ संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सभी कार्यक्रम आखिर में स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों में सुधार करते हैं जिनसे भारत के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आता है। उन्होंने टीबी का उन्‍मूलन करने के देश के प्रयासों के मॉडल का उदाहरण दिया, जिसके लिए पोषण संबंधी सहायता और व्यापक सामाजिक जागरूकता की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने बढ़ते हुए बजटीय प्रावधानों पर प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य भारत के नागरिकों को समग्र स्वास्थ्य उपलब्‍ध कराना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि टीबी के 65 प्रतिशत मामले 15 से 45 आयु वर्ग से संबंधित हैं। यह आयु वर्ग आर्थिक रूप से सर्वाधिक उत्पादक जनसंख्या का हिस्‍सा है। इससे यह तथ्य भी जुड़ा है कि टीबी के 58 प्रतिशत मामले ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जिसका यह मतलब है कि पूरा परिवार टीबी के कारण आगे बढ़ने की गतिशीलता से बाहर हो गया है। इसलिए उन्होंने सभी सांसदों से यह अपील की है कि वे नागरिकों को टीबी और इसके उपचार के बारे में जागरूक करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करें।
डॉ. भारती पवार ने कोविड-19 की शुरुआत से टीबी उन्मूलन की यात्रा में आने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि वैश्विक स्‍तर पर वर्ष 2020 में पूरी दुनिया ने कोविड-19 महामारी के कारण रिकॉर्ड तोड़ गति के साथ विनाशकारी जीवन, अर्थव्यवस्थाओं, स्वास्थ्य प्रणालियों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को देखा है। कुछ ही महीनों में इस महामारी ने टीबी के खिलाफ लड़ाई में वर्षों के दौरान हुई प्रगति को उलट दिया है। मार्च 2020 में इस महामारी की शुरुआत से लॉकडाउन और आवाजाही प्रतिबंधों को बढ़ावा मिलने और उपलब्‍ध स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली संसाधनों, बुनियादी ढांचों, निदान और उपचार केंद्रों और मानव शक्ति को कोविड-19 से लड़ने के कार्य में लगाने के कारण पूरे देश में टीबी उन्मूलन के प्रयासों और सेवाओं में बाधा उत्‍पन्‍न हुई है। उन्होंने संसद के अपने सहयोगियों को टीबी के उन्मूलन में आई इस रुकावट को तेजी से दूर करने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने टीबी के सामाजिक निर्धारकों से निपटने के लिए राज्यों के साथ सामूहिक जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से साझा करने का भी सुझाव दिया। केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव श्री राजेश भूषण, लोकसभा के महासचिव श्री उत्‍पल कुमार सिंह, और सुश्री आरती आहूजा (अपर सचिव स्‍वास्‍थ्‍य) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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एमजी/एएम/आईपीएस/एसएस
 

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