भारत के सैन्य प्रमुख और बड़े सैन्य अधिकारियों के निधन पर राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं?

भारत के सैन्य प्रमुख और बड़े सैन्य अधिकारियों के निधन पर राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं?

जब पाकिस्तान परस्त राजनेताओं के निधन पर सरकारी शोक हो सकता है, तब भारत के सैन्य प्रमुख और बड़े सैन्य अधिकारियों के निधन पर राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं?
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भारत की तीनों सेनाओं के प्रमुख बिपिन रावत और ब्रिगेडियर एल.एल.लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह सहित 13 जवानों की दर्दनाक मृत्यु 8 दिसंबर को तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के कुन्नूर क्षेत्र की पहाडिय़ों में हेलीकॉप्टर के क्रेश हो जाने से हो गई। इस दु:खद घटना की सूचना मिलते ही पूरे देश में शोक व्याप्त हो गया। देश की सुरक्षा में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। सीडीएस न केवल तीनों सेनाओं में समन्वय का काम करते हैं, बल्कि दुश्मन देशों के खिलाफ तीनों सेनाओं की साझा रणनीति भी बनाते हैं। बिपिन रावत ने सीडीएस के पद पर रहते हुए चीन और पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत रणनीति बनाई। लेकिन ऐसे व्यक्ति के निधन पर सरकारी स्तर पर शोक की घोषणा नहीं होना वाकई दुखद बात है। जो व्यक्ति देश की सेवा सौ करोड़ लोगों की सुरक्षा के लिए सीमाओं पर वाहनों को मुस्तैद रखता है क्या उस व्यक्ति का देश में कोई महत्व नहीं है? हम देखते हैं कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री या राज्यपाल के निधन पर संबंधित राज्यों में दो तीन दिन का शोक घोषित कर तिरंगे तक को झुका दिया जाता है। यही नियम पूर्व प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि पर भी लागू होते हैं। कई मौकों पर तो राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया जाता है। भले ही ऐसे राजनेता अपने जीवन काल में पाकिस्तान के समर्थक रहे हों, जो राजनेता मौजूदा समय में खुलेआम पाकिस्तान के समर्थक हैं, उनके निधन पर भी सरकारी शोक घोषित होगा, क्योंकि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे पाकिस्तान परस्त राजनीति मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल आदि के पदों पर रह चुके हैं। अजीब विडंबना है कि जो राजनेता पाकिस्तान और चीन के समर्थन में खड़े हैं उनके निधन पर तो राजकीय शोक होगा, लेकिन जिन सीडीएस बिपिन रावत ने पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन देशों से भारत को बचाया उनके निधन पर सरकारी स्तर पर शोक घोषित होने का प्रावधान नहीं है। कोई माने या नहीं लेकिन बिपिन रावत सहित 13 सैन्य अधिकारियों का निधन देश के लिए बहुत बड़ी घटना है। देश से प्रेम करने वाले सभी नागरिक गम में है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस देश में ऐसे लोग भी राजनीति कर रहे हैं, जिन्होंने हमारी फौज को भी नहीं बख्शा है। हमें ऐसे तत्वों से हर मौके पर सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि ऐसे तत्व नाजुक मौकों पर ही अपने मंसूबे पूरा करने की फिराक में रहते हैं। सीडीएस बिपिन रावत की देशभक्ति की जितनी प्रशंसा की जाए,उतनी कम है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने स्तर पर प्रदेश में राजकीय शोक घोषित किया है। रावत उत्तराखंड के ही रहने वाले थे।

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