नई दिल्ली, 11 अप्रैल: भारतीय रेलवे ने वरिष्ठ नागरिकों को ट्रेन टिकट पर मिलने वाली रियायतें बंद करके पिछले पांच वर्षों में भारी राजस्व अर्जित किया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत रेल मंत्रालय के अधीन काम करने वाले सेंटर फॉर रेलवे इंफोर्मेशन सिस्टम (CRIS) द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार, रेलवे ने इस अवधि में लगभग 8,913 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व कमाया है।
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब संसद में कई बार वरिष्ठ नागरिकों के लिए टिकटों पर रियायत बहाल करने का मुद्दा उठाया गया है। हालांकि, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि रेलवे पहले से ही प्रत्येक यात्री को औसतन 46 प्रतिशत की रियायत प्रदान करता है।
गौरतलब है कि 20 मार्च, 2020 से पहले 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष और ट्रांसजेंडर यात्रियों को सभी वर्गों के टिकटों पर 40 प्रतिशत की छूट मिलती थी, जबकि 58 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को 50 प्रतिशत की छूट मिलती थी। कोविड-19 महामारी के कारण रेल मंत्रालय ने इस छूट को वापस ले लिया था।
मध्य प्रदेश के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने इस संबंध में रेल मंत्रालय में कई आरटीआई आवेदन दायर किए थे। मार्च 2025 के अपने नवीनतम आवेदन के विश्लेषण के आधार पर उन्होंने बताया कि 20 मार्च, 2020 से 28 फरवरी, 2025 के बीच लगभग 18.279 करोड़ पुरुष, 13.065 करोड़ महिलाएं और 43,536 ट्रांसजेंडर यात्रियों ने बिना रियायत के यात्रा की।
रेल मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली रियायतें बहाल करने की मांगों का लगातार विरोध किया है। 19 मार्च, 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि भारतीय रेलवे समाज के सभी वर्गों को सस्ती सेवाएं प्रदान करने का प्रयास करता है और 2022-23 में यात्री टिकटों पर 56,993 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जो प्रति यात्री औसतन 46 प्रतिशत की रियायत है।
हालांकि, आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रियायतें बहाल करने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि एक आम नागरिक जीवन भर विभिन्न करों का भुगतान करता है और वरिष्ठ नागरिक की उम्र में प्रवेश करने के बाद क्या वह रेलवे से रियायती टिकट की सुविधा की उम्मीद नहीं कर सकता? उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार किस आधार पर खुद को कल्याणकारी राज्य कहती है।
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