राष्ट्रीय आयुष मिशन: अब एक ही छत के नीचे मिलेंगी आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं
केंद्र सरकार ने आयुष (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत, अब मरीजों को एक ही स्थान पर आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने राज्य सभा में बताया कि केंद्र सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला अस्पतालों (डीएच) में आयुष सुविधाओं की सह-स्थापना की रणनीति अपनाई है। इसका मतलब है कि अब मरीजों को एक ही जगह पर आयुर्वेदिक डॉक्टरों से भी परामर्श लेने का विकल्प मिलेगा।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के प्रमुख उद्देश्य:
- आयुष स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का विस्तार: पूरे देश में आयुष स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूत बनाना और बेहतर बनाना।
- समग्र आरोग्य मॉडल: आयुष सिद्धांतों और परिपाटी के आधार पर निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना।
- मरीजों को विकल्प: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं की सह-स्थापना के माध्यम से मरीजों को विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के लिए विकल्प उपलब्ध कराना।
- आयुष शिक्षा का विकास: आयुष शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे को बढ़ाना और मजबूत करना।
कैसे काम करेगी यह योजना?
- आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय आयुष डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत समर्थन प्रदान करेगा।
- बुनियादी ढांचे का विकास: आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत आयुष बुनियादी ढांचे, उपकरण और दवाओं के लिए समर्थन प्रदान करेगा।
इस योजना से क्या फायदे होंगे?
- मरीजों को एक ही स्थान पर आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
- आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा।
- लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तृत विकल्प मिलेगा।
- निवारक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
यह योजना आयुष चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने और लोगों को स्वस्थ जीवन जीने में मदद करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।