भरतपुर, : डीग जिले के कुम्हेर में एक अध्यापक को 86 लाख रुपये का बकाया वेतन न मिलने के मामले में अदालत के आदेश पर जिला परिषद भवन, कुम्हेर बीडीओ की कार और कुम्हेर पंचायत समिति भवन को कुर्क करने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
6 दिसंबर को जिला परिषद भवन पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया जा चुका था और सोमवार को कुम्हेर पंचायत समिति भवन और बीडीओ की कार पर भी कुर्की का नोटिस चस्पा किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 1992 में महेश शर्मा नामक एक अध्यापक को उनकी डिग्री फर्जी बताकर शिक्षा विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ शर्मा ने 1994 में अदालत में याचिका दायर की। अदालत ने हाल ही में शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जिला परिषद को 86 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।
जब जिला परिषद ने यह राशि देने से इनकार किया तो अदालत ने जिला परिषद भवन, कुम्हेर बीडीओ की कार, कुम्हेर पंचायत समिति भवन और कलेक्टर की कार को कुर्क करने का आदेश दिया।
अगर भुगतान नहीं हुआ तो होगी नीलामी
अगर एक महीने के भीतर अध्यापक महेश शर्मा को यह राशि नहीं दी जाती है तो कुर्क की गई कार और बिल्डिंग की नीलामी की जाएगी।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
यह एक दुर्लभ मामला है जहां अदालत ने सरकारी संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया है। इसका कारण यह है कि जिला परिषद ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया।
समाज में क्या संदेश?
यह मामला यह संदेश देता है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और अगर किसी के साथ अन्याय होता है तो उसे न्याय मिलना चाहिए। साथ ही, यह भी बताता है कि अदालतें कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती हैं।
आगे क्या होगा?
अब देखना होगा कि जिला परिषद इस मामले में क्या कदम उठाती है। क्या वह अध्यापक महेश शर्मा को बकाया राशि का भुगतान करेगी या फिर कुर्क की गई संपत्ति की नीलामी होगी।
#कुम्हेर #जिलापरिषद #नीलामी #अध्यापक #न्याय
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.