चुनाव हारने के बाद एम्पलाई यूनियन आत्म मंथन और चिंतन में जुटी हुई है। इसके चलते रविवार को उमरावमल पुरोहित सभागार में एक बैठक भी आयोजित की गई है।
यूनियन द्वारा पर्याप्त वोट नहीं मिलने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इसके लिए पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि चार पांच और छह दिसंबर को रेलवे कर्मचारी संगठनों की मान्यता के चुनाव हुए थे। 12 दिसंबर को आए परिणामों में 20 साल से जमी यूनियन को बड़ा झटका लगा है। यूनियन यह चुनाव हार गई। यूनियन मान्यता के लिए जरूरी 35 प्रतिशत वोट हासिल करने मे विफल रही। इसके उलट रेलवे मजदूर संघ ने मान्यता का यह आंकड़ा पार कर लिया। इसके चलते पश्चिम मध्य रेल प्रशासन ने पूरे जोन में मात्र एक संगठन मजदूर संघ को मान्यता जारी कर दी।
जीत से ज्यादा हार पर चर्चा
रेलवे के अलावा बाहर भी यह चुनाव काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस चर्चा में खास बात यह सामने आ रही है कि लोग मजदूर संघ की जीत से ज्यादा यूनियन की हार पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग इसके कारण गिना रहे हैं तो कई इसे अप्रत्यक्षित बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह चर्चा सबसे ज्यादा गर्म है।