नई दिल्ली: रेलवे सहित सभी केंद्रीय कर्मचारियों को कोरोना महामारी के दौरान रोके गए भत्तों का मिलना अब और भी मुश्किल लग रहा है। यह अनुमान इसलिए लगाया जा रहा है क्योंकि सरकार सोमवार को संसद में इस महत्वपूर्ण प्रश्न का सीधा उत्तर देने से बचती दिखी।
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने संसद में सरकार से सवाल किया था कि वह कोरोना काल के 18 महीने के महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का बकाया कब तक जारी करेगी। इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सीधे तौर पर कोई समय-सीमा नहीं बताई।
चौधरी ने अपने जवाब में कहा, "महामारी के प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव और सरकार द्वारा उठाए गए कल्याणकारी उपायों के वित्तपोषण का वित्तीय भार वित्त वर्ष 2020-21 से आगे भी जारी रहा। इसलिए, डीए/ डीआर का बकाया देना व्यवहार्य नहीं माना गया।"
जाहिर है, सांसद भदौरिया को अपने प्रश्न का सीधा जवाब नहीं मिल सका। भदौरिया जहां यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि भत्ते कब तक मिलेंगे, वहीं मंत्री चौधरी यह बताते रहे कि ये भत्ते क्यों नहीं मिल पाए।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2020 से 1 जुलाई 2020 तथा 1 जनवरी 2021 से देय महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) की तीन किस्तों को फ्रीज करने का निर्णय कोविड-19 के संदर्भ में लिया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी वित्त पर दबाव को कम करना था।
चौधरी ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में यह भी जानकारी दी कि सरकार का राजकोषीय घाटा वित्तीय वर्ष 2020-21 में 9.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 (बजट अनुमान) में 4.4 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि राजकोषीय स्थिति में सुधार के बावजूद कर्मचारियों को उनके बकाया भत्ते क्यों नहीं दिए जा रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों और यूनियनों की ओर से लगातार इन भत्तों को जारी करने की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार के ताजा जवाब से ऐसा लगता है कि फिलहाल इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना कम है।
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