NEW DELHI.: इटारसी से जबलपुर तक ट्रेन की बोगी के नीचे ट्रॉली में बैठकर 250 किलोमीटर की यात्रा करने की खबर को रेलवे ने भ्रामक और आधारहीन बताया है। यह खबर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद रेल मंत्रालय ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि चलती ट्रेन के व्हीलसेट पर छिपना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना एवं प्रचार) दिलीप कुमार ने अपने बयान में कहा कि इस रिपोर्ट की कोई ठोस पुष्टि नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि किसी ने खड़ी हुई ट्रेन के व्हील एक्सल के पास से एक व्यक्ति का वीडियो शूट किया और इसे भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। वीडियो में दावा किया गया था कि व्यक्ति के पास टिकट खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए उसने व्हीलसेट के पास छिपकर यात्रा की।
दिलीप कुमार ने यह भी बताया कि ट्रेन के चलते समय व्हीलसेट पर छिपना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि अत्यंत खतरनाक भी है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह घटना ट्रेन के चलते समय नहीं हुई थी।
दानापुर एक्सप्रेस ट्रेन जबलपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो कैरिज एंड वैगन विभाग (एसीएंडडब्ल्यू) के कर्मचारियों ने रोलिंग जांच के दौरान बोगी के नीचे ट्रॉली में छिपे हुए एक युवक को देखा। उन्होंने तुरंत ट्रेन रुकवाई और युवक को बाहर निकाला। पूछताछ में युवक ने दावा किया कि वह इटारसी से जबलपुर तक ट्रॉली में छिपकर आया है।
रेलवे कर्मचारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया और सुरक्षा के मद्देनजर इसकी जांच शुरू की। हालांकि, रेलवे ने इस युवक के दावे को अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया है।
रेल मंत्रालय ने कहा कि ट्रेन के चलते समय व्हीलसेट पर छिपे रहना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि यह अत्यंत जोखिमपूर्ण और असंभव है। मंत्रालय ने समाचार संगठनों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया है कि बिना पुष्टि किए हुए ऐसी भ्रामक खबरें न फैलाएं।
इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, रेलवे ने इसे गलतफहमी का परिणाम बताया है और मामले को स्पष्ट कर दिया है।
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