नई दिल्ली, 11 अप्रैल: भारतीय रेलवे ने लोको पायलटों की ड्यूटी के दौरान भोजन करने और शौचालय जाने के लिए समय (ब्रेक) देने की लंबे समय से चली आ रही मांग को खारिज कर दिया है। रेलवे बोर्ड ने एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए इस मांग को परिचालन संबंधी कारणों से अस्वीकार्य बताया है।
'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ड्यूटी के दौरान लोको पायलटों को भोजन और शौच के लिए ब्रेक देना परिचालन की दृष्टि से संभव नहीं है। इस फैसले से ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएसए) में नाराजगी है।
एआईएलआरएसए ने रेलवे बोर्ड के इस निर्णय की कड़ी निंदा की है और समिति की सिफारिशों को अवास्तविक और निराधार करार दिया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष/मुख्य कार्यकारी अधिकारी को लिखे पत्र में एआईएलआरएसए के महासचिव केसी जेम्स ने कहा कि समिति लोको पायलटों के काम का सही मूल्यांकन करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों की रफ्तार 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ने के बाद लोको पायलटों के तनाव के स्तर में जो वृद्धि होती है, उसका आकलन समिति ने ठीक से नहीं किया।
केसी जेम्स ने लोकोमोटिव में शौचालय की सुविधा न होने और शौच के लिए ब्रेक न दिए जाने को अस्वीकार्य बताया है। एआईएलआरएसए के केंद्रीय संगठन के सचिव वी. बालचंद्रन ने कहा कि कई सुपरफास्ट ट्रेनें लगभग 6-7 घंटे तक बिना रुके चलती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रात 11:10 बजे विजयवाड़ा में नई दिल्ली-चेन्नई तमिलनाडु एक्सप्रेस की जिम्मेदारी संभालने वाले चालक दल को अगली सुबह 6:35 बजे चेन्नई पहुंचने तक ट्रेन को लगातार चलाना पड़ता है।
वी. बालचंद्रन ने महिला लोको पायलटों की स्थिति को और भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि अधिक ट्रैफिक वाले मार्गों पर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों को बीच के स्टेशनों या किनारे के स्टेशनों पर तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक कि कोई आपातकालीन स्थिति न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि जब लोको पायलट भोजन नहीं कर पाता या शौचालय जाने की आवश्यकता को नियंत्रित करने में असमर्थ होता है, तो इससे उसका ध्यान भटकता है और वह कम सतर्क हो जाता है, जिससे सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बालाचंद्रन ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले खतरे में सिग्नल पार करने वाली ट्रेनों (train passing the signal at danger) के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की जांच के बाद लोको पायलटों के लंबे काम के घंटों और उनकी कार्य स्थितियों की समीक्षा करने के लिए कई सिफारिशें की गई थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
इसके अलावा, एआईएलआरएसए ने लोको केबिन में क्रू वॉयस और वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाने का भी विरोध किया है, इसे निजता का उल्लंघन बताया है।
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