जयपुर: हाल ही में अजमेर रोड पर हुए भीषण हादसे के पीछे परिवहन विभाग की लापरवाही सामने आई है। खतरनाक और ज्वलनशील पदार्थों का परिवहन करने वाले टैंकरों के चालकों को फर्जी सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जिससे बड़े हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
नियमों के अनुसार, इन चालकों को हर पांच साल में तीन दिन का प्रशिक्षण राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से लेना होता है। इसके अलावा, फील्ड टेस्ट भी जरूरी होता है, जो केवल ट्रैक पर ही किया जा सकता है। हालांकि, परिवहन विभाग ने बिना ट्रैक वाले कई सेंटरों को मान्यता दे दी है।
प्रदेश में बहुत कम संस्थान ऐसे हैं जिनके पास वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर है। बालोतरा, सीकर, अजमेर और बीकानेर में कई फर्जी सेंटर चल रहे हैं। इन सेंटरों के एजेंट बिना किसी प्रशिक्षण के ही पैसे लेकर लोगों को सर्टिफिकेट बांट रहे हैं। ऑयल कंपनियों ने इस गंभीर मुद्दे पर चिंता जताई है और बड़े हादसे होने की आशंका व्यक्त की है। एक संस्थान तो एक महीने में हजारों लोगों को बिना किसी प्रशिक्षण के एक ही ट्रेनर के भरोसे सर्टिफिकेट दे रहा है।
यह लापरवाही न केवल यातायात सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि लोगों की जान को भी जोखिम में डालती है। ऐसे में परिवहन विभाग को तुरंत कार्रवाई कर फर्जी सर्टिफिकेट देने वाले संस्थानों पर रोक लगाने की जरूरत है। साथ ही, सभी चालकों को वास्तविक प्रशिक्षण देने और फील्ड टेस्ट करवाने के लिए कड़े नियम लागू करने चाहिए।
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.