फसल मुआवजे में किसानों के साथ होती है ठगी,न पॉलिसी की समझ न बीमा कम्पनियों के नियमों की जानकारी

फसल मुआवजे में किसानों के साथ होती है ठगी,न पॉलिसी की समझ न बीमा कम्पनियों के नियमों की जानकारी

फसल मुआवजे में किसानों के साथ होती है ठगी,न पॉलिसी की समझ न बीमा कम्पनियों के नियमों की जानकारी

जैसलमेर के किसानो की हर साल मौसम की मार तो कभी पानी की कमी के चलते फसल खराब होती है। लेकिन किसानों को खराब हुई फसलों का बीमा क्लेम आज तक नही मिला। केसीसी करवाते समय किसानों के खाते से प्रीमियम तो काट लिया जाता है लेकिन उसके बाद किसानों को न तो पॉलिसी मिलती है और जटिल प्रक्रिया के चलते किसान खराबे का दावा भी नही कर पाते। जिससे किसान प्रीमियम भरने के बाद फसल खराब होने के बावजूद भी क्लेम नही उठा पा रहे हैं। जबकि बीमा कंपनियां किसानों को छलने का काम कर रही है। गौरतलब है कि पिछले साल 60 से 80 प्रतिशत तक खराबा हुआ था। टिड्डियों के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा था। जिस पर खुद मुख्यमंत्री ने जैसलमेर आकर खराबे का जायजा लेकर मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन सरकार की तरफ से जो राशि मुआवजे के रूप में दी गई थी वो ऊँट के मुंह में जीरे के समान थी। सरकार की तरफ से सिर्फ 12 हजार रुपये दिए गए थे जिससे किसानों के खाद बीज के खर्च से भी बेहद कम थे। लेकिन तब भी बीमा कम्पनियों द्वारा क्लेम नही दिया गया था। इस बार तेज अंधड़ ने फसलों को बर्बाद कर दिया है। सरकार द्वारा किसानों को गिरदावरी करवाने का आश्वासन दिया जा रहा है। लेकिन पिछले सालों की अगर तुलना की जाए तो इस गिरदावरी से भी कोई फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है। नहरी क्षेत्र के किसान लूणसिंह राजपुरोहित ने बताया कि जैसलमेर में पिछले10 सालों से बीमा कम्पनियां किसानों के साथ ठगी कर रही है। जैसलमेर में निजी बैंक HDFC द्वारा बीमा किया जाता है लेकिन वो क्लेम नही देता जबकि पड़ोसी जिले बाड़मेर में सरकारी कम्पनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा बीमा किया जाता है। जिससे किसानों को क्लेम मिल रहा है। हमारी सरकार से मांग है कि जैसलमेर में भी सरकारी कम्पनी से फसलों का बीमा करवाया जाए।

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