परिवार नियोजन में गर्भनिरोधक गोलियां कारगर- सीएमएचओ – करौली

परिवार नियोजन में गर्भनिरोधक गोलियां कारगर- सीएमएचओ – करौली

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा-
परिवार नियोजन में गर्भनिरोधक गोलियां कारगर- सीएमएचओ
करौली, 19 जुलाई। परिवार नियोजन के साधनों में सर्वाधिक लोकप्रिय साधन गर्भ निरोधक गोलियां हैं, जिन्हें गर्भ निरोधक के रूप में महिलायें अपने स्वविवेक से भी काम में लेकर जनसंख्या स्थिरता में अपनी भागीदारी निभा रही हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दिनेशचंद मीना ने बताया कि गर्भ निरोधक गोलियां गर्भवती होने से बचाने वाला ऐसा साधन है जो नियमित सेवन किया जाता है इसमें माला-एन और माला-डी प्रचलित है जो प्रतिदिन ली जाने वाली गोलियां है वही सेंटक्रोमेन (छाया) सप्ताह में सिर्फ दो बार ली जाकर अनचाहे गर्भ को रोकने में कारगर है। उन्होंने बताया कि सभी चिकित्सा संस्थाओं पर गर्भ निरोधक गोलियां उपलब्ध है और सरलता से प्राप्त की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि ये गोलियां 28 दिनों के मासिक चक्र पर आधारित होती हैं, पहले 21 दिनों तक सफेद रंग की गोलियां एंव बाद के 7 दिनों के लिए लाल रंग की लौह तत्व युक्त गोलियां ली जाती है। इस गोली का कार्य महिला के अंडाशय से हर महिने निकलने वाले अण्डाणु के रोकना है,जो बच्चेदानी की सतह की मोटाई को कम कर देती हैं जिससे अण्डाणु या भ्रूण के ठहरने की संभावना कम हो जाती है।
गोलियां सुरक्षित और असरकारक
उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (पक) डॉ. सतीशचंद मीना ने बताया कि सभी प्रकार की गर्भ निरोधक गोलियां सुरक्षित और असरकारक है लेकिन जो महिलायें प्रतिदिन गोलियां लेने में असुविधा महसूस करती है और बच्चों को दूध पिलाती हैं वे सेंटक्रोमेन (छाया) का उपयोग कर सकती हैं।उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं को हार्माेनल विधि का उपयोग न करने की सलाह दी गई हो , वहां सेंटक्रोमेन (छाया) गर्भ निरोधक साधन का उपयोग सप्ताह में दो दिन कर गर्भधारण को रोका जा सकता है।

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