नादोती
जिला करोली की पंचायत समिति नादोती ग्राम पंचायत गढ़मोरा के गांव धोलादाता में पेयजल संकट
मजबूरी की वजह से पलायन , पानी की तलाश में लगाने पड़ते घरों में ताले ,
गढ़मोरा पंचायत के धोला दाता गांव में गर्मी की दस्तक से घरों में ताले लग जाते हैं ग्रामीणों के लिए गर्मी मुसीबत लाती है इन्हें पानी की तलाश में दूसरी जगह पलायन करना पड़ता है
दुर्गम पहाड़ियों में बसे धोला दाता गांव में करीब 140 घर हैं जिसमें करीब 12 सौ की आबादी है पानी के लिए एकमात्र हेडपंप का सहारा है इसके अलावा नवाडेरा भाटाडा़ सहित आधा दर्जन ढाणियों के लोग भी पहाड़ियों पर निवास करते हैं गर्मी के दिनों में लोग दूसरी जगह चले जाते हैं जब बारिश का मौसम आता है तो पशुओं के साथ वापस लौट आते हैं
धोलादाता करौली जिले में आता है सवाई माधोपुर जिले के कोचर गांव में इसी से लगा हुआ गांव है धोलादाता से लगा हुआ गांव है वहां पर भी पानी की बहुत किल्लत है लालसोट तहसील के पंचायतें भी आती है वहां के लोग भी पलायन को मजबूर रहते हैं करौली सवाई माधोपुर और दोसा तीनों जिलों की सीमा पर दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित है धोलादाता गांव
यहां पर गोवंश पर भी रहता है संकट धोलादाता गांव सहित आधा दर्जन एकमात्र गुर्जर जाति के लोग निवास करते हैं पेयजल किल्लत के चलते होली के बाद गांव में अधिकांश घरों में ताले लग जाते हैं समीपवर्ती गांव गढ़मोरा सहित रेवासा , भोडवाड़ा , चिरावंडा आदि गांवो में इनके प्रमुख ठिकाने हैं गर्मियों के दिनों में मवेशियों के लिए भी कोई पानी की व्यवस्था नहीं है धोलादाताओं की महिलाओं ने बताया कि अधिकांश लोग गर्मी शुरू होते ही अपने परिवारों के साथ पलायन करते हैं घरों से कीमती सामान अपने साथ ले जाते हैं घरों के दरवाजे पर कटीली झाड़ियां लगा देते हैं ताकि अनजान व्यक्ति घुस नहीं सके गांव के लोगों ने बताया कि ग्रामीण तो पानी के लिए दूसरी जगह पलायन कर जाते हैं पर यहां पहाड़ी पर गोवंश विचरण करता है वह पानी के अभाव में संकट में रहता है और अन्य वन्य जीव पानी के लिए भटकते रहते हैं गर्मी में पानी नहीं मिलने से बहुत सारी मात्रा में गाय और वन्य जीव प्यास के कारण दम तोड़ देते हैं 2016 वर्ष में भी काफी गायों ने यहां पर दम तोड़ दिया था उस वक्त सचिन पायलट ने गांव की पहाड़ी पर जाकर दौरा किया था गोवंश के लिए चारा और पानी की व्यवस्था नहीं है इसलिए गोवंश को बचाने के लिए चारा पानी की व्यवस्था करवाई जाए सही एक तालाब स्थित है जिसकी खुद आए हुए बरसों हो गए हैं अगर इसकी खुदाई हो जाए तो पानी की व्यवस्था हो सकती है ग्राम पंचायत द्वारा मस्टरोल के द्वारा खुद वाना भी काफी मुश्किल है क्योंकि यह तालाब की भूमि वन विभाग की भूमि में आती है जिसके कारण यहां पर ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग द्वारा योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है नरेगा कानून के तहत भी तालाब की खुदाई हो पाना संभव नहीं है दो राज्य सरकार चाहे तो पानी की तलाई को खुदवाया जा सकता है बरसात के पानी को स्टोर किया जा सके एकत्रित किया जा सके और ग्रामीणों और वन्यजीवों के काम आ जाए
साथी राजेश आदिवासी
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