वृक्षारोपण के लिये निर्धारित समयावधि मे कार्ययोजना तैयार करेंः- सीईओ : करौली

वृक्षारोपण के लिये निर्धारित समयावधि मे कार्ययोजना तैयार करेंः- सीईओ : करौली

वृक्षारोपण व्यवस्थित हो और पौधे जीवित रहे यह सुनिश्चित किया जाए
वृक्षारोपण के लिये निर्धारित समयावधि मे कार्ययोजना तैयार करेंः- सीईओ
करौली, 11 जून। महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में आगामी मानसून में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पौधारोपण किये जाने संबंध में राज्यव्यापी वृहद एवं व्यवस्थित वृक्षारोपण अभियान शुरू करने के संबंध में जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग के निर्देशों की पालना मे मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवचरण मीना की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि समस्त जिला स्तरीय अधिकारी अपने चार दीवारी युक्त भवनों, कार्यालयों मे सघन मे सघन वृक्षारोपण के लिये तीन वर्ष की कार्ययोजना बनाकर एवं लगाये जाने वाले पौधे की संख्या, पानी का स्त्रोत, वृक्षारोपण की देखभाल करने वाले कर्मचारी का नाम सहित अन्य सूचनाएं शीघ्र भिजवाने के निर्देश दिये ।उन्होने बताया कि 25 जून से पूर्व आवश्यक स्वीकृतियां सहित अन्य कार्य समय पर करवाया जा सके। इसके साथ ही उन्होने जिला स्तरीय अधिकारियों को वृक्षारोपण के लिए स्थान चिन्हित करने, सड़कों के किनारे पौधे लगाने, चारागाह भूमि, मॉडल तालाब, अन्य तालाब, वन भूमि, स्टेडियम, शमशान, कब्रिस्तान, नहर एवं नदियों के किनारे, सरकारी भवनों, राजकीय विद्यालयों, आंगनबाडी केन्द्रों, राजीव गांधी ई-सेवा केन्द्रों, पंचायत भवन, एएनएम सेन्टर, पंचायत समिति व अन्य कार्यालयों एवं जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य किए जाएं ताकि जिले को हराभरा बना सकें। उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण करने से पूर्व सडक की पटरी मरम्मत, अनावश्यक मलबे एवं झाडिओं को हटाने का कार्य भी सुनिश्चित किया जाए ताकि पौधे जीवित रह सकें और पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी कोई भी व्यक्ति लें यह भी सुनिश्चित किया जाए। वृक्षारोपण का उद्देश्य है कि वृक्ष फल-फूल कर प्राण वायु दे जिसका लाभ आमजन को मिले।
सीईओ ने कहा कि वृक्ष तो लगा दिए जाते हैं लेकिन उनकी देखभाल के बिना नष्ट हो जाएं, ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा सडक के किनारे किए जाने वाले पौधारोपण में पौधों की विविधता व उनकी सौन्दर्यपरक एकरूपता में संतुलन हो और एक निर्धारित दूरी पर वृक्ष लगाएं जिससे एकरूपता बनें। उन्होंने बताया कि आम, वील, आमला, बैर, सीताफल आदि जैसे फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं तथा अन्य तरह के पेडों का भी चयन भौगोलिक परिस्थितनुसार किया जा सकता है। सडक की पास की वाउण्ड्री पर सजावटी पौधे लगाए जा सकते हैं। सडक के किनारे पौधों की सुरक्षा, रख-रखाब किया जाए। फलदार पौधों की देखभाल सडक सीमा में लगते हुए खेत मालिक द्वारा किए जाने की भी व्यवस्था की जाए।
बैठक में उपनिदेशक महिला एंव बाल विकास प्रभातीलाल जाट, डीएसओ रामसिंह मीना, कोषाधिकारी भरतलाल मीना, जिला शिक्षा अधिकारी भरतलाल मीना, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी धर्मेन्द्र मीना, जीएम डीआईसी केके मीना, उपनिदेशक कृषि रामलाल जाट, आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक बहाुदर सिंह डागुर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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