किसान आंदोलन के खिलाफ स्थानीय लोगों का हंगामा-टेंट उखाड़े, किसान नेता पर भड़काने का आरोप, SHO पर तलवार से हमला
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गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा के बावजूद कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करने वाले किसान सिंघू बॉर्डर पर डटे हैं. किसानों के प्रदर्शन स्थल पर आज एक बार फिर से हंगामा हो गया. खुद को स्थानीयवासी बताने वाले लोगों का हुजूम वहां पहुंचा और धरना समाप्त कर रास्ता खोलने की मांग करने लगे. इन लोगों ने ‘सिंघू बॉर्डर खाली करो’, ‘भारत माता की जय’, ‘तिरंगे का अपमान नही सहेंगे’ के नारे लगाने लगे. उन्होंने किसानों के टेंट को उखाड़ दिया है. इससे वहां के हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े. जानकारी के मुताबिक, इस अफरातफरी के बीच प्रदर्शनकारी की तलवार से बचाव में अलीपुर के SHO प्रदीप पालीवाल घायल हो गए, उनका हाथ कट गया है और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल भी हो गया है.
सिंघू सीमा पर पुलिस ने कथित तौर पर स्थानीय होने का दावा करने वालों और किसानों पर बल प्रयोग किया. स्थानीय होने का दावा करने वाले लोग विरोध स्थल खाली करने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान किसानों से उनकी झड़प हो गई. SHO प्रदीप पालीवाल ने कहा कि वहाँ एक व्यक्ति तलवार से हमला करने को आगे बढ़ा जिसको बचाव के लिए आगे बढ़ा और वह मेरे हाथ पर जा लगा. उन्होंने कहा मैंने देखा कि कुछ किसान नेता उनको भड़का रहे थे इसमें उन्होंने पाल सिंह का नाम भी लिया.
बताया जा रहा है की सिंघू सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को वहां से हटाने के लिए बवाना और नरेला से कथित तौर पर स्थानीय लोग पहुंचे थे. उन्होंने किसानों पर पत्थरबाजी की और गालियां दी. कुछ किसानों ने लाठियां भी मारी. काफी समय तक पुलिस ने कथित स्थानीयों को समझाया और फिर लाठी चार्ज किया.
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