नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की सस्ते राशन योजना में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी (IT) विभाग ने जांच के बाद पाया है कि सरकार के ही 5600 से ज्यादा कर्मचारी अवैध रूप से इस योजना का लाभ उठा रहे थे। IT विभाग ने इस संबंध में सेवा विभाग को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की है। सूत्रों की मानें तो सेवा विभाग इन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के साथ-साथ उनसे योजना के तहत प्राप्त लाभ की वसूली के आदेश भी जारी कर सकता है। IT विभाग ने सेवा विभाग के साथ इन कर्मचारियों के पद और अन्य संबंधित जानकारियां भी साझा की हैं।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन कर्मचारियों की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक होने के बावजूद वे गरीबों के लिए चलाई जा रही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सस्ते राशन का लाभ उठा रहे थे। दिल्ली सरकार के नियमों के अनुसार, सालाना 24,200 रुपये या उससे कम आय वाले परिवारों को ही गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) माना जाता है और वे ही इस योजना के पात्र हैं।
दिल्ली के IT विभाग के सूत्रों के अनुसार, विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभार्थियों की समीक्षा के दौरान 3000 से ज्यादा ऐसे लाभार्थी पाए, जिन्होंने राजस्व विभाग से आय प्रमाण पत्र बनवाया था और उसमें अपनी सालाना आय एक लाख रुपये से ज्यादा दर्शाई थी। इसके बावजूद, इन लोगों को अधिक सब्सिडी वाला राशन दिया जा रहा था। इसके बाद, IT विभाग ने राजस्व विभाग के साथ राशन कार्ड के रिकॉर्ड साझा करते हुए जांच का अनुरोध किया। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, दिल्ली के मुख्य लेखा कार्यालय और राजस्व विभाग से प्राप्त रिकॉर्ड की संयुक्त जांच में इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ।
दरअसल, दिल्ली का IT विभाग दिल्ली में विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए डेटा को एकीकृत करने का कार्य कर रहा है। यह एकीकृत डेटा सभी विभागों के लिए एक भंडार के रूप में काम करेगा, जिससे योजनाओं का समय पर अपडेट, क्रॉस-रेफरेंसिंग और बेहतर शासन व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। इसी प्रक्रिया के तहत दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों ने अपने रिकॉर्ड IT विभाग के साथ साझा किए थे।
डेटा विश्लेषण के दौरान, IT विभाग को पता चला कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के लगभग 5621 लाभार्थियों के रिकॉर्ड दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के पे एंड अकाउंट्स ऑफिस (PAO) के डेटा से मेल खाते हैं। IT विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर राशन कार्डों में परिवार की मुखिया के तौर पर महिला का नाम दर्ज है, जिससे लाभार्थियों की पहचान करना थोड़ा मुश्किल हो गया था। हालांकि, क्रॉस-डेटा एनालिसिस के माध्यम से बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आईं।
अब IT विभाग ने यह सारा डेटा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, सेवा विभाग और PAO विभागों के साथ साझा कर दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने यह भी बताया कि जांच में यह भी पाया गया कि 3072 राशन कार्ड लाभार्थियों के पास ऐसे आय प्रमाण पत्र थे जिनमें उनकी सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक दिखाई गई थी, फिर भी उन्हें अधिक सब्सिडी वाली राशन योजना का लाभ मिला।
IT विभाग ने संबंधित विभागों से इन लाभार्थियों के रिकॉर्ड को साफ करने और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। विभाग ने सस्ते राशन योजना के तहत लाभार्थी के रूप में पहचाने गए सभी सरकारी कर्मचारियों की सूची, उनके राशन कार्ड नंबर, पदनाम और कर्मचारी कोड सहित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को कार्रवाई के लिए भेज दी है। अब सेवा विभाग खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के साथ समन्वय स्थापित करके इन कर्मचारियों से लाभ की वसूली और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर सकता है। इस बड़े खुलासे से दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
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