सीएम भजनलाल और वसुंधरा राजे दिल्ली में, कैसी होगी नए मंत्रिमंडल की सूरत, जानिए

सीएम भजनलाल और वसुंधरा राजे दिल्ली में, कैसी होगी नए मंत्रिमंडल की सूरत, जानिए

जयपुर: राजस्थान में भजनलाल सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर दिल्ली में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दिल्ली में होने की खबर ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि नए मंत्रिमंडल की सूरत कैसी होगी और इसमें किन विधायकों को जगह मिलेगी।

वसुंधरा राजे का बढ़ता दबाव

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, जो लंबे समय से शांत थीं, अब अपनी सक्रियता बढ़ा चुकी हैं। जयपुर में 17 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बाद वसुंधरा लगातार चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि राजे अपने खेमे के विधायकों को मंत्रिमंडल में एंट्री दिलाने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं। तीन दिन पहले वसुंधरा ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी और अब वे फिर से दिल्ली में हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि वसुंधरा समर्थक कालीचरण सराफ, श्री चंद कृपलानी, अनीता भदेल, प्रताप सिंह सिंघवी और शत्रुघ्न गौतम जैसे विधायकों के नाम मंत्रिमंडल में संभावित एंट्री के लिए उछल रहे हैं।

सीएम भजनलाल भी फीडबैक रिपोर्ट के साथ दिल्ली में

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मंत्रिमंडल के पुनर्गठन को लेकर हाईकमान के साथ चर्चा में व्यस्त हैं। एक साल के कार्यकाल के बाद मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की संभावनाएं जताई जा रही हैं। सीएम ने मंत्रियों की परफॉर्मेंस का फीडबैक दिल्ली दरबार में पेश किया है। माना जा रहा है कि इस फीडबैक रिपोर्ट के आधार पर नॉन-परफॉर्मर मंत्रियों को हटाया जा सकता है और नए चेहरों को जगह दी जाएगी।

तीन स्तरों पर बड़े बदलाव की तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी तीन स्तरों पर बदलाव की तैयारी कर रही है। इनमें संगठन स्तर पर फेरबदल, मंत्रिमंडल का पुनर्गठन और नगर निगम बोर्ड के विभिन्न पदों पर नियुक्तियां शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान मंत्रिमंडल में लगभग आधा दर्जन मंत्रियों के पत्ते कटने की संभावना है। वहीं, कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं और उपचुनाव के बाद नए विधायकों को भी शामिल किया जा सकता है।

सियासत में हलचल तेज

दिल्ली में सीएम भजनलाल और वसुंधरा राजे की मुलाकातों के बाद प्रदेश की सियासत में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। क्या वसुंधरा समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी? क्या नॉन-परफॉर्मर मंत्रियों को हटाया जाएगा? ये सवाल हर किसी की जुबान पर हैं।

क्या कहती है वसुंधरा की सक्रियता?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वसुंधरा राजे की दिल्ली दौड़ बीजेपी के अंदर खेमेबाजी की ओर इशारा करती है। लंबे समय से वसुंधरा समर्थकों को नजरअंदाज किया गया है, लेकिन अब वसुंधरा राजे इसे बदलने की कोशिश कर रही हैं।

नए मंत्रिमंडल पर निगाहें

प्रदेश की जनता और बीजेपी कार्यकर्ता अब नए मंत्रिमंडल की सूरत पर नजरें गड़ाए हुए हैं। क्या सीएम भजनलाल और हाईकमान वसुंधरा राजे के दबाव के आगे झुकेंगे? या फिर पार्टी अपने मौजूदा फैसले पर अडिग रहेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल जाएगा।

निष्कर्ष

भजनलाल सरकार के मंत्रिमंडल का यह संभावित फेरबदल न केवल सरकार के कामकाज को नया रूप देगा, बल्कि राजस्थान की सियासत को भी नई दिशा में मोड़ सकता है। दिल्ली की हलचल पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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