नई दिल्ली। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद में अपने पहले भाषण के दौरान कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने अपनी दादी और भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल की गलती को स्वीकार करते हुए कहा कि इतिहास से सबक लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर संविधान को कमजोर करने और आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया।
प्रियंका गांधी ने इमरजेंसी के मुद्दे पर कहा, "यहां 1975 की बातें की जाती हैं। मैं कहती हूं कि फिर आप भी सीख लीजिए। आप बैलेट पेपर से ही चुनाव क्यों नहीं करा लेते। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।" उन्होंने भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संविधान के सुरक्षा कवच को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, "संविधान बदलने का काम शुरू हो गया है। आरक्षण को कमजोर करने के लिए लेटरल एंट्री और निजीकरण का सहारा लिया जा रहा है। यदि लोकसभा में ऐसे नतीजे नहीं आए होते तो शायद ये संविधान बदलने का काम भी शुरू कर देते।"
जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने कहा कि यह आवश्यक है ताकि समाज में हर वर्ग की स्थिति का पता चल सके और उसके आधार पर नीतियां बनाई जा सकें। उन्होंने कहा, "जब हमने जाति जनगणना की मांग उठाई तो इनका जवाब था- भैंस चुरा लेंगे और मंगलसूत्र चुरा लेंगे।"
प्रियंका गांधी ने कहा कि भाजपा के नेता जवाहरलाल नेहरू के कामों की आलोचना तो करते हैं, लेकिन वर्तमान की चुनौतियों पर बात करने से बचते हैं। उन्होंने अडानी समूह पर निशाना साधते हुए कहा, "सरकार एक आदमी को बचाने में जुटी है। सारे एयरपोर्ट, खदान, बंदरगाह और कंपनियां अडानी को दी जा रही हैं। आज गरीब और गरीब होता जा रहा है, जबकि अमीर और अमीर हो रहे हैं।"
प्रियंका गांधी ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को अतीत में जीने की बजाय वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सेब के कारोबार में अडानी समूह की एंट्री का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे छोटे किसानों का नुकसान हो रहा है।
प्रियंका गांधी का यह भाषण विपक्ष के लिए एक सशक्त आवाज के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने इमरजेंसी की गलती को स्वीकार कर सच्चाई का सामना करने का संदेश दिया, वहीं भाजपा सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए। जाति जनगणना, आरक्षण और संविधान के मुद्दे पर उनके बयानों ने विपक्ष की रणनीति को नई धार दी है।
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