कोटा-डकनिया के बीच टूटे बिजली के तार, 2 घंटे ठप रहा रेल यातायात, 6 दिन में दूसरी घटना

कोटा-डकनिया के बीच टूटे बिजली के तार, 2 घंटे ठप रहा रेल यातायात, 6 दिन में दूसरी घटना

कोटा-डकनिया के बीच टूटे बिजली के तार, 2 घंटे ठप रहा रेल यातायात, 6 दिन में दूसरी घटना
कोटा-डकनिया स्टेशन के बीच गुरुवार को ट्रेन संचालन के लिए लगे बिजली के तार (ओएचई) टूट गए। इसके चलते डाउन लाइन पर करीब 2 घंटे तक रेल यातायात ठप रहा। बाद में तारों की मरम्मत कर ट्रेनों को चलाया गया।
सूत्रों ने बताया कि यह घटना दोपहर करीब 2 बजे की है। बोरखेड़ा ओवर ब्रिज के नीचे बिजली के तार अचानक टूट गए। तार टूटने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चला है। प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में कबूतर के कारण तार टूटने की बात सामने आ रही है। पुलिया के नीचे दोनों तारों के बीच गैप अपेक्षाकृत कम है। इसके चलते संभवत नीचे के तार पर बैठा कबूतर ऊपर वाले तार से टकरा गया। इसके चलते अर्थिंग के कारण जोरदार विस्फोट के साथ तार टूट गया। जांच में कबूतर भी मौके पर मरा पड़ा मिला है।
ट्रैक मैन को चला घटना का पता
सूत्रों ने बताया कि घटना का पता सबसे पहले एक ट्रैक मेंटेनर को चला। इसके बाद की-मैन अब्दुल वहीद ने मामले की जानकारी अपने अधिकारियों और कोटा कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलते ही हरकत में आए प्रशासन में ट्रेनों को तुरंत रुकवाया। इसके चलते एक मालगाड़ी को डकनिया स्टेशन पर रोका गया।
सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद कोटा से पहुंची टावर वैगन द्वारा टूटे तारों की मरम्मत की गई। उसके बाद शाम 4 बजे बाद रेल यातायात दोबारा शुरू हो सका।
6 दिन में दूसरी घटना
कोटा मंडल में ओएचइ टूटने की 6 दिन में यह दूसरी घटना है। इससे पहले कोटा-बूंदी रेलखंड में श्रीनगर और जालंधरी स्टेशनों के बीच स्थित भीमलत सुरंग में शनिवार रात को बिजली के तार टूट गए थे। इस घटना में मंदसौर- कोटा ट्रेन के इंजन का पैंटोग्राफ दी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके चलते ट्रेन करीब साढे तीन घंटे सुरंग में फंसी रही थी। ट्रेन के रात भर सुरंग के अंदर में फंसे रहने के कारण यात्रियों को गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया था।
तुरंत राहत देने में नाकाम रहा प्रशासन
घटना के बाद ट्रेन को जल्द से जल्द सुरंग से बाहर निकाल कर यात्रियों को राहत देने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा था। ट्रेन को डीजल इंजन लगाकर सुबह करीब 6 बजे सुरंग से बाहर निकाला गया था। कोटा रेल मंडल में संभवत यह पहला मौका है जब कोई ट्रेन लगातार 4 घंटे तक सुरंग में फंसी रही हो और प्रशासन गहरी नींद सोता रहा।
सूत्रों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर पश्चिम-मध्य रेलवे जबलपुर मुख्यालय द्वारा इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। मामले में मुख्यालय ने कोटा अधिकारियों से जवाब तलब भी किया है।

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