फर्जी मामला सामने आने के बाद भी नहीं किया कार पार्किंग का टेंडर, डेढ़ साल में रेलवे को लगा लाखों का चूना

फर्जी मामला सामने आने के बाद भी नहीं किया कार पार्किंग का टेंडर, डेढ़ साल में रेलवे को लगा लाखों का चूना

फर्जी मामला सामने आने के बाद भी नहीं किया कार पार्किंग का टेंडर, डेढ़ साल में रेलवे को लगा लाखों का चूना
कोटा। फर्जी चलाने का मामला सामने आने के डेढ़ साल बाद भी रेलवे ने कार पार्किंग का ठेका करना जरूरी नहीं समझा है। इस दौरान रेलवे ने कार पार्किंग को अभी कोटेशन पर तो कभी मुफ्त में भी चलाया है। इससे रेलवे को पिछले करीब डेढ़ साल में लाखों रुपए का चूना लगा है। हालांकि रेलवे द्वारा जल्द ही इसके टेंडर करने की बात कही जा रही है।
उल्लेखनीय है कि फर्जी कार पार्किंग का मामला गत वर्ष फरवरी में पकड़ा गया था। इसके बाद कोरोना के चलते मार्च में ट्रेनों का संचालन बंद हो गया था। इसके चलते सभी ठेके भी बंद हो गए थे। इसके बाद मई में ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू हुआ था। लेकिन रेलवे ने कार पार्किंग का टेंडर करना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद रेलवे में अक्टूबर-नवंबर में कार पार्किंग को कोटेशन पर देने का निर्णय लिया। इसके बाद टेंडर में जानबूझकर देरी कर बार-बार कोटेशन निकाला जाने लगा। नियमों का हवाला देकर एक ही पार्टी का कोटेशन बार-बार बढ़ाया जाता रहा। एक-दो बार तो नया निकाले बिना ही एक ही पार्टी को पुराना कोटेशन बढ़ा दिया गया। हालांकि टेंडर में देरी के चलते रेलवे ने दो बाबुओं को निलंबित भी किया था। लेकिन इसके बाद भी कार पार्किंग का टेंडर नहीं हो सका।
फ्री में चलाई कार पार्किंग
इसके बाद दोबारा कोरोना बढने पर ट्रेनों में यात्री भार कम हो गया। इसके चलते रेलवे ने कुछ ट्रेनों को दोबारा से बंद भी किया था। यात्री नहीं आने पर ठेकेदारों में कोटेशन लेना भी बंद कर दिया। इसके बाद रेलवे ने कार पार्किंग पर टीटीइयों की ड्यूटी लगा दी। बाद में इसका विरोध होने पर रेलवे ने टीटीइयों को हटाकर कार पार्किंग फ्री कर दी थी।
हर महीने कोटेशन
इसके बाद रेलवे ने कार पार्किंग का हर महीने कोटेशन करना शुरू कर दिया। जबकि पहले तीन 3 महीने के कोटेशन दिए गए थे। कोटेशन के साथ रेलवे टेंडर भी निकाल दिया। लेकिन लाइसेंस फीस अधिक होने के कारण किसी ठेकेदार ने टेंडर भरने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
दो-तीन बार कोई ठेकेदार नहीं आने पर रेलवे ने अब लाइसेंस फीस कुछ कम करके फिर से टेंडर निकाला है। यह टेंडर अब 2 नवंबर को खुलना है। इस टेंडर की सालाना फीस जीएसटी सहित करीब 50 लाख रुपए रखी गई है। जबकि इससे पहले यह राशि करीब 54 लाख थी। इस तरह समय पर टेंडर नहीं होने से रेलवे को पिछले करीब डेढ़ साल में लाखों रुपए का चूना लगा है।
ढाई साल चल चुका है फर्जी
उल्लेखनीय है कि कार पार्किंग का ठेका करीब ढाई साल फर्जी चल चुका है। उस समय कोटा के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक विजय प्रकाश थे। विजय प्रकाश इन दिनों भोपाल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं। ऐसे मामले सामने आने के बाद सीबीआई ने विजय प्रकाश का नाम एग्रीड लिस्ट में शामिल किया है। इसके चलते रेलवे ने भी विजय प्रकाश के वित्तीय अधिकार समाप्त कर दिए हैं।

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