सतह आई रेलवे मजदूर संघ की गुटबाजी, अध्यक्ष और महामंत्री ने एक दूसरे को किया निलंबित

सतह आई रेलवे मजदूर संघ की गुटबाजी, अध्यक्ष और महामंत्री ने एक दूसरे को किया निलंबित

सतह आई रेलवे मजदूर संघ की गुटबाजी, अध्यक्ष और महामंत्री ने एक दूसरे को किया निलंबित
कोटा। न्यूज़. लंबे समय से चल रही पश्चिम-मध्य रेलवे मजदूर संघ की गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। मामला इतना बढ़ गया कि महामंत्री अशोक शर्मा ने अध्यक्ष आरपी भटनागर और उनके पुत्र अमित को तथा भटनागर ने शर्मा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया।
यह मामला सामने आने के बाद संघ में हड़कंप मचा हुआ है।
यह मामला अभी यहीं रुकता नजर नहीं आ रहा। इसके अभी और आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अपने अधिकारों को लेकर मामला अदालत तक भी पहुंच जाएं।
शर्मा ने बताया कि गुरुवार को जबलपुर स्थित एक निजी होटल में मुख्यालय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सर्वसम्मति से परिवारवाद को बढ़ावा देने, पद का दुरुपयोग करने, असंवैधानिक तरीके से पद पर बने रहने तथा संगठन विरोधी गतिविधियों के कारण भटनागर और उनके पुत्र अमित को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया। भटनागर को 3 दिन का नोटिस जारी किया गया है। इस दौरान भटनागर को सारे अधिकारों से वंचित रखा गया है। मामले में आगे की कार्रवाई अब 3 दिन बाद की जाएगी।
बैठक में 112 वर्किंग कमेटी सदस्यों में 80 सदस्य मौजूद थे। इनमें जबलपुर के अलावा भोपाल और कोटा मंडल के सीएम उपाध्याय, अब्दुल खालिक तथा जेबी सिंह सहित कई पदाधिकारी भी शामिल थे।
शर्मा भी निलंबित
मामले की भनक लगते भटनागर ने भी आनस फानस में एक पत्र जारी कर अशोक शर्मा को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए। इसी के साथ भटनागर ने शर्मा के डेपुटेशन अधिकार भी छीन लिए। साथ ही निलंबन के दौरान शर्मा को संघ की किसी भी गतिविधि में भाग लेने और निर्णय लेने से वंचित कर दिया। इसी के साथ भटनागर ने कोटा रेलवे मंडल सचिव अब्दुल खालिक का डेपुटेशन भी समाप्त कर दिया।
डेपुटेशन समाप्त होने पर अब पदाधिकारियों को ड्यूटी पर जाना होगा। उल्लेखनीय है कि डेपुटेशन पर रहने वाले पदाधिकारियों को नौकरी पर जाना जरूरी नहीं होता। इससे रेलवे को होने वाले नुकसान की भरपाई विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी जेब से करते हैं।
बैठक में अध्यक्ष का होना जरूरी
मामले में विशेषज्ञों का कहना है कार्यकारिणी की बैठक में अध्यक्ष का होना जरूरी होता है।अध्यक्ष ही बैठक की अध्यक्षता करता है। बैठक में सभी निर्णय अध्यक्ष की मौजूदगी में लिए जाते हैं अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अगर किसी कारण वर्ष बैठक आयोजित भी कर ली गई तो इसमें लिए गए निर्णय को अध्यक्ष को बताना जरूरी होता है। अध्यक्ष की सहमति के बाद ही निर्णय को लागू किया जा सकता है। बिना अध्यक्ष को सूचना दिए कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करना असंवैधानिक है। इस इस मामले में संवैधानिक अधिकार फिलहाल भटनागर के पास है। हो सकता है आने वाले दिनों में बाजी पलट जाए। इसके चलते अगले कुछ दिन संघ के लिए भारी उठापटक, हंगामेदार,भागदौड़ और जोड़-तोड़ वाले रहना निश्चित है।

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